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दिव्या देशमुख वर्ल्ड चेस चैंपियन बनीं | पीएम मोदी ने दी बधाई

Divya Deshmukh World Champion 2025 | PM Modi on Divya Deshmukh | FIDE Women’s World Cup 2025

दिव्या देशमुख वर्ल्ड चेस चैंपियन बन गई हैं और इस जीत ने भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 19 साल की इस युवा शतरंज खिलाड़ी ने FIDE महिला वर्ल्ड कप 2025 का खिताब अपने नाम किया और भारत का नाम दुनिया में रोशन किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें खास बधाई दी और देशवासियों से कहा कि ये हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। भारत की 19 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने FIDE वुमेन्स वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीतकर न सिर्फ भारत का नाम रोशन किया, बल्कि विश्व शतरंज की दुनिया में भी नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। “दिव्या देशमुख वर्ल्ड चेस चैंपियन के रूप में उभरी हैं, और यह उपलब्धि भारतीय शतरंज इतिहास में एक मील का पत्थर है।”उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें खास बधाई दी और दोनों भारतीय बेटियों – दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी – के प्रयासों की सराहना की।

पीएम मोदी का दिव्या देशमुख के लिए खास संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा –

“दो शानदार भारतीय शतरंज खिलाड़ियों के बीच एक ऐतिहासिक फाइनल देखने को मिला। युवा दिव्या देशमुख को FIDE महिला वर्ल्ड चैंपियन 2025 बनने पर बहुत-बहुत बधाई। यह जीत न सिर्फ उनके लिए बल्कि देश के लिए भी गर्व का विषय है। यह जीत अनेक युवाओं को प्रेरित करेगी।”

पीएम मोदी ने कोनेरू हम्पी के प्रदर्शन की भी तारीफ करते हुए लिखा –

“कोनेरू हम्पी ने भी टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया। मैं दोनों खिलाड़ियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”

दिव्या देशमुख की ऐतिहासिक जीत

नागपुर की रहने वाली दिव्या देशमुख ने शतरंज की दुनिया में वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना आज से कुछ साल पहले करना भी मुश्किल था। उन्होंने न सिर्फ FIDE वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई, बल्कि फाइनल मुकाबले में भारत की दिग्गज खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को हराकर खिताब अपने नाम किया।

फाइनल में क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा और दोनों खिलाड़ी 1-1 की बराबरी पर रहीं। इसके बाद 28 जुलाई को जॉर्जिया में हुए रैपिड राउंड में दिव्या ने हम्पी को मात देकर खिताब अपने नाम किया।

क्यों खास है दिव्या की यह जीत?

  • दिव्या देशमुख FIDE वुमेन्स वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं।
  • उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की है, बल्कि भारत को विश्व शतरंज मानचित्र पर ऊंचा स्थान दिलाया है।
  • इस जीत से भारत में महिला खिलाड़ियों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा, खासकर उन युवाओं को जो शतरंज को करियर के रूप में अपनाना चाहते हैं।

कोनेरू हम्पी की भूमिका भी रही अहम

फाइनल में दिव्या देशमुख का मुकाबला भारत की ही अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी से था। हम्पी ने टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन किया और फाइनल तक का सफर तय कर भारत का नाम रोशन किया। उनके अनुभव और रणनीतिक कौशल ने फाइनल को और रोमांचक बना दिया।

हालांकि आख़िरी बाज़ी में युवा जोश ने अनुभव को मात दे दी और दिव्या विजेता बनीं।

भारत में खुशी की लहर

दिव्या देशमुख की जीत के बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लग गया है। खेल मंत्रालय, शतरंज फेडरेशन, खेल विशेषज्ञों और आम जनता ने दिव्या को बधाई दी। नागपुर में जश्न का माहौल है, जहां दिव्या के घर पर लोग ढोल-नगाड़ों के साथ उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं।

निष्कर्ष

दिव्या देशमुख की यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बेटियों की क्षमता, मेहनत और आत्मविश्वास का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेजा गया बधाई संदेश इस बात का प्रमाण है कि देश को अपनी बेटियों पर गर्व है। आने वाले समय में दिव्या देशमुख जैसे खिलाड़ियों से देश को और बड़ी उम्मीदें होंगी।

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