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जीएसटी पर वित्त मंत्री का बड़ा एलान, जानिए क्या-क्या सस्ता हुआ

नई दिल्ली।जीएसटी दरों में बदलाव 2025 पर देशभर की निगाहें टिकी थीं। आखिरकार बुधवार रात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब भारत में जीएसटी की दरें सरल कर दी गई हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार देर रात जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) को लेकर ऐतिहासिक घोषणा की। जीएसटी काउंसिल की बैठक में लंबे विचार-विमर्श के बाद टैक्स स्लैब को सरल बनाने पर सहमति बनी है। अब देश में केवल दो प्रमुख जीएसटी दरें लागू होंगी – 5 फ़ीसदी और 18 फ़ीसदी

12% और 28% स्लैब खत्म

वित्त मंत्री ने बताया कि अब तक लागू 12% और 28% वाले स्लैब को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को मिलेगा। नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी।

सरकार को होगा राजस्व घाटा

जीएसटी दरों में इस बड़े बदलाव से केंद्र सरकार को लगभग 93,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इस फैसले से टैक्स प्रणाली को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है।

40% स्लैब से अतिरिक्त आमदनी

जीएसटी काउंसिल ने यह भी निर्णय लिया है कि लक्ज़री सामान, तंबाकू उत्पाद, पान मसाला और शुगर ड्रिंक्स जैसी वस्तुओं पर 40% जीएसटी दर लागू रहेगी। इस स्लैब से सरकार को लगभग 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान है।

सर्वसम्मति से लिया गया फैसला

बैठक में शामिल सभी राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। चूँकि हर किसी की सहमति थी, इसलिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी। हालांकि, राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर असर

  • सस्ता होगा रोज़मर्रा का सामान: 12% स्लैब खत्म होने के बाद अब कई आवश्यक वस्तुएँ 5% श्रेणी में आ सकती हैं, जिससे ग्राहकों को राहत मिलेगी।
  • 18% स्लैब में आएंगे ज़्यादातर प्रोडक्ट्स: मिड-रेंज और प्रीमियम श्रेणी की चीज़ों पर 18% टैक्स लगेगा।
  • लक्ज़री उत्पाद होंगे महंगे: 40% स्लैब जारी रहने के कारण लग्ज़री कार, तंबाकू उत्पाद और शुगर ड्रिंक्स जैसी चीज़ें महंगी बनी रहेंगी।

क्या-क्या सस्ता हुआ

रोज़मर्रा की चीज़ें जो सस्ती हुईं – जीएसटी 5 फ़ीसदी

  • हेयर ऑयल, शैंपू, टूथपेस्ट, टॉयलेट शॉप बार, टूथब्रश, सेविंग क्रीम, बटर, घी, चीज़, डेयरी स्प्रैड
  • पैकेज्ड़ नमकीन, भुजिया मिक्स्चर, बर्तन, बच्चों की दूध पीने की बोतल, नैपकिन और डायपर
  • सिलाई की मशीन और इसके पुर्जे

हेल्थकेयर सेक्टर

  • हेल्थ और लाइफ़ इंश्योरेंस (जीएसटी 18 परसेंट से घटकर ज़ीरो)
  • थर्मामीटर, मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन, डाइग्लोनस्टिक किट, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स (जीएसटी 5 परसेंट)

एजुकेशन और एग्रीकल्चर सेक्टर

मैप, चार्ट, ग्लोब, पेंसिल, शार्पनर, कलर्स, बुक और नोटबुक, इरेजर (जीएसटी घटकर ज़ीरो)

ट्रैक्टर टायर और इसके पुर्जे पर (जीएसटी 18 परसेंट से घटकर 5 परसेंट)

ट्रैक्टर, बायो कीटनाशक, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, स्प्रिंकलर (जीएसटी 12 परसेंट से घटकर 5 परसेंट)

इलेक्ट्रॉनिक सामान जो सस्ते हुए

बर्तन धोने की मशीनों, एसी मशीनों जैसे- मोटर से चलने वाले पंखे और ह्यूमिडिटी कंट्रोल करने वाले एलिमेंट पर जीएसटी 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी किया गया.

टीवी, मॉनिटर्स, प्रोजेक्टर और सेट टॉप बॉक्सेज पर भी जीएसटी 28 से घटाकर 18 पर्सेंट किया गया.

लग्ज़री जीएसटी टैक्स -40 फ़ीसदी

  • पान मसाला, सिगरेट, गुटखा
  • एरेटेड वाटर, कैफीनयुक्त पेय
  • बड़ी साइज वाली कार

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का कहना है कि अलग-अलग दरों वाले स्लैब से टैक्स प्रणाली जटिल हो जाती थी और कारोबारियों के लिए भी असुविधा होती थी। अब सिर्फ दो मुख्य दरों के चलते न केवल कारोबारियों को फायदा होगा बल्कि आम जनता के लिए भी टैक्स की गणना आसान होगी।

आगे की चुनौतियाँ

हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई है। चूँकि पहले से ही कई राज्य जीएसटी संग्रह को लेकर चिंता जता चुके हैं, ऐसे में केंद्र और राज्यों को मिलकर कोई ठोस समाधान निकालना होगा।


निचोड़

जीएसटी काउंसिल का यह फैसला भारत की टैक्स प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद इसका असर आम जनता और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर कितना पड़ता है।

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