Nimisha Priya Case: निमिषा प्रिया की फांसी टली, यमन सरकार ने सुनाया राहत भरा फैसला – भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
Nimisha Priya Case में यमन ने मौत की सजा रद्द की। भारत सरकार और मुफ्ती अबुबकर के प्रयासों से आई बड़ी कूटनीतिक सफलता।भारतीय नर्स निमिषा प्रिया (Nimisha Priya Case) को यमन में मिली मौत की सज़ा को रद्द कर दिया गया है। यह फैसला न सिर्फ भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है, बल्कि उन लाखों भारतीयों के लिए राहत की खबर है जो विदेशों में काम करते हैं। यह मामला सालों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों और मीडिया में छाया हुआ था। आखिरकार भारत सरकार, सामाजिक संगठनों और खासकर ग्रैंड मुफ्ती अबुबकर मुसलियार के प्रयास रंग लाए।
कौन हैं निमिषा प्रिया?
निमिषा प्रिया केरल की रहने वाली एक प्रशिक्षित नर्स हैं, जो 2008 में बेहतर रोजगार की तलाश में यमन गई थीं। वहां उन्होंने सना शहर में एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू किया। शुरुआत में सब कुछ ठीक चला, लेकिन धीरे-धीरे स्थितियाँ बिगड़ने लगीं।
महदी ने कथित रूप से निमिषा को परेशान करना शुरू कर दिया। उसने खुद को सार्वजनिक रूप से उसका पति बताना शुरू कर दिया और निमिषा का पासपोर्ट जब्त कर लिया। इसके बाद वह यमन में फँस गईं और भारत लौटने की कोई संभावना नहीं रह गई।
हत्या का आरोप और कानूनी मामला
साल 2017 में निमिषा प्रिया ने महदी से छुटकारा पाने की कोशिश की। उन्होंने उसे बेहोश कर उसका पासपोर्ट वापस लेने का प्रयास किया, लेकिन नशीली दवा की अधिक मात्रा से महदी की मृत्यु हो गई। इसके बाद निमिषा पर हत्या का केस दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
साल 2020 में यमन की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। दिसंबर 2024 में यमन के राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी और जनवरी 2025 में हूती शासन के नेता महदी अल-मशात ने इस फैसले को औपचारिक मंजूरी भी दे दी।
कैसे बची जान?
निमिषा की फांसी 16 जुलाई 2025 को तय थी। लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले भारत के ग्रैंड मुफ्ती एपी अबुबकर मुसलियार ने यमन सरकार से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात कर सजा रोकने की अपील की। इसके बाद यमन की राजधानी सना में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई और फांसी पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया गया।
अब, ग्रैंड मुफ्ती के कार्यालय ने यह घोषणा की है कि यमन सरकार ने निमिषा प्रिया की मौत की सज़ा को पूरी तरह रद्द कर दिया है। यह फैसला न केवल मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की कूटनीतिक क्षमता का भी प्रमाण है।
भारत सरकार की भूमिका
भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया। विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास, केरल सरकार और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर इस सजा को रुकवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़ उठाई। सोशल मीडिया कैंपेन, मानवाधिकार संगठनों का समर्थन और मीडिया की निरंतर कवरेज ने भी इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर जीवंत बनाए रखा।
यमन की न्याय प्रणाली और माफीनामा की परंपरा
यमन में “दिया” (मुआवजा) और “माफीनामा” की परंपरा है, जिसमें पीड़ित पक्ष के परिवार से माफी और मुआवजा मिलने पर आरोपी की सजा माफ की जा सकती है। इस मामले में यह भी चर्चा थी कि मृतक महदी के परिजनों से बातचीत कर ‘ब्लड मनी’ (रक्त-पैसा) के जरिए समझौता किया जा सकता है। हालांकि, अब इस नए फैसले से स्पष्ट हो गया है कि सजा पूरी तरह खत्म कर दी गई है।
क्या आगे भारत लौटेंगी निमिषा?
इस समय तक भारत या यमन सरकार की ओर से इस फैसले की औपचारिक लिखित पुष्टि नहीं आई है। लेकिन ग्रैंड मुफ्ती के कार्यालय का बयान आधिकारिक रूप से इसे बहुत बड़ी राहत मानता है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही निमिषा प्रिया को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
निष्कर्ष
Nimisha Priya Case भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सामाजिक एकजुटता और मानवीय संवेदनाओं की एक बड़ी मिसाल है। यह मामला बताता है कि संगठित प्रयासों से कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ बदली जा सकती हैं। भारत ने एक बार फिर अपने नागरिक को बचाने में सफलता पाई है, और यह जीत हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।
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