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सरकार का दावा, ऑनलाइन मनी गेम्स से हुआ लोगों को दो लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा का नुक़सान, नए क़ानून से छिड़ी बहस

ऑनलाइन मनी गेम्स पर नया कानून: सरकार का दावा, इंडस्ट्री का विरोध और लोगों की जंग

Online Money Games Ban in India 2025 भारत में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। सरकार का कहना है कि ऑनलाइन मनी गेम्स से लाखों लोग कर्ज और डिप्रेशन का शिकार हुए और लगभग दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। भारत में तेजी से बढ़ती ऑनलाइन मनी गेम्स इंडस्ट्री पर अब ब्रेक लग गया है। सरकार का कहना है कि इस इंडस्ट्री ने करोड़ों लोगों को कर्ज, डिप्रेशन और आत्महत्या की ओर धकेल दिया। वहीं इंडस्ट्री का तर्क है कि यह फैसला जल्दबाज़ी में लिया गया है, जिससे रोजगार और निवेश को भारी नुकसान हुआ है।


कार्तिक (बदला हुआ नाम) की कहानी: लत से बर्बाद ज़िंदगी

दिल्ली के 26 वर्षीय कार्तिक श्रीनिवास (बदला हुआ नाम) का उदाहरण इस पूरे विवाद को और गहराई से समझाता है।

  • 2019 में शौक के तौर पर शुरू हुआ ऑनलाइन बेटिंग का खेल धीरे-धीरे उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित हुआ।
  • पांच साल में कार्तिक ने 15 लाख रुपये से अधिक गंवा दिए।
  • इसमें उनकी तीन साल की कमाई, बचत और दोस्तों-परिवार से लिया गया कर्ज शामिल था।
  • 2024 तक आते-आते वो पूरी तरह कर्ज में डूब गए और डिप्रेशन का शिकार हो गए।

कार्तिक कहते हैं:
“मैंने कई ऐप्स, अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म और लोकल बुकी सब आज़माए। शुरू में लगा जल्दी पैसे कमाऊंगा, लेकिन आखिर में सब कुछ गंवा बैठा।”

उनकी कहानी अकेली नहीं है। ऐसे लाखों लोग हैं जो ऑनलाइन मनी गेम्स की लत से बर्बादी की कगार पर पहुंच गए।


सरकार का दावा: दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि:

  • 2019 से 2024 के बीच ऑनलाइन मनी गेम्स की वजह से लोगों को लगभग दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  • करीब 45 करोड़ भारतीय किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए।
  • हजारों लोग कर्ज में डूबे, मानसिक बीमारियों का शिकार हुए और कुछ ने आत्महत्या तक कर ली।

सरकार का कहना है कि नया कानून लोगों को जुए जैसी लत से बचाने के लिए जरूरी है।


नए कानून के प्रावधान

भारत सरकार ने जो केंद्रीय कानून बनाया है, उसके तहत:

  • ऐसे सभी ऐप्स और प्लेटफ़ॉर्म गैरकानूनी माने जाएंगे।
  • इन्हें बढ़ावा देने, उपलब्ध कराने या प्रचार करने पर जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।
  • नियम तोड़ने वालों को:
    • तीन साल तक की जेल
    • एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना
    • प्रचार करने वालों को दो साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

हालांकि खिलाड़ियों को अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित माना गया है।


इंडस्ट्री का तर्क: “जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला”

पाबंदी से पहले भारत में लगभग 400 रियल मनी गेम्स स्टार्टअप काम कर रहे थे।

  • इनसे सरकार को सालाना करीब 2.3 अरब डॉलर टैक्स मिलता था।
  • ढाई लाख से ज्यादा लोगों को रोज़गार मिला हुआ था।
  • ड्रीम11 और माई11सर्कल जैसी कंपनियां भारतीय क्रिकेट और आईपीएल से जुड़ी थीं।

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है:

  • सरकार ने स्किल गेम्स और चांस गेम्स में फर्क किए बिना ही पाबंदी लगा दी।
  • निवेशकों ने करोड़ों डॉलर लगाए थे, अब सब बर्बाद हो गया।
  • रोजगार पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

अदालतों के पुराने फैसले

भारत के कई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुके हैं कि:

  • फैंटेसी स्पोर्ट्स और पोकर जैसे गेम्स स्किल गेम्स हैं।
  • इन्हें जुए की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता।
  • कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कोर्ट ने पाबंदी हटाई थी।

यानी जहां कोर्ट का रुख “रेग्युलेशन” की ओर था, वहीं सरकार ने “पूर्ण पाबंदी” का रास्ता चुना।


विदेशी वेबसाइटों का खतरा

इंडस्ट्री फेडरेशनों का मानना है कि इस पाबंदी का उल्टा असर होगा।

  • भारतीय ऐप्स बंद होने से लोग विदेशी जुआ वेबसाइटों और लोकल बुकी नेटवर्क की तरफ जाएंगे।
  • वहां न तो सुरक्षा है और न ही पारदर्शिता।
  • व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए पहले से ही अवैध सट्टेबाज़ी हो रही है।
  • वीपीएन के जरिए विदेशी ऐप्स आसानी से एक्सेस किए जा सकते हैं।

इससे सरकार का उद्देश्य पूरा होने के बजाय हालात और बिगड़ सकते हैं।


विशेषज्ञों की राय: एल्गोरिदम से होता है खिलाड़ियों का शोषण

  • वीडियो गेमिंग कंपनी एनकोर गेम्स के विशाल गोंडल का कहना है:
    “ऑनलाइन रमी और पोकर जैसे खेलों में खिलाड़ी अक्सर बॉट्स से खेलते हैं। एल्गोरिदम इस तरह बनाए जाते हैं कि अंत में हमेशा कंपनी को फायदा होता है।”
  • उनका मानना है कि इन खेलों को “कौशल का खेल” कहना ऐसा है जैसे शराब को “जूस” कह देना।

रोजगार और निवेश पर संकट

  • पाबंदी से ढाई लाख लोगों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।
  • विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है।
  • ड्रीम11 (8 अरब डॉलर की कंपनी) और माई11सर्कल (2.5 अरब डॉलर की कंपनी) जैसे दिग्गजों ने अपने ऑपरेशन बंद कर दिए हैं।

मुंबई के वकील जय सेता कहते हैं:
“रेग्युलेशन की जरूरत थी, लेकिन पाबंदी ने पूरे सेक्टर को खत्म कर दिया।”


जनता की प्रतिक्रिया: राहत या चिंता?

लोगों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है।

  • एक वर्ग का कहना है कि यह सही कदम है, इससे परिवार और युवा सुरक्षित रहेंगे।
  • वहीं दूसरा वर्ग मानता है कि शिक्षा और जागरूकता के जरिए समस्या का समाधान किया जा सकता था।

कार्तिक श्रीनिवास जैसे लोग कहते हैं:
“पाबंदी से हालात और खराब होंगे, क्योंकि अब लोग अवैध प्लेटफॉर्म की ओर जाएंगे। कम से कम भारतीय ऐप्स में कुछ जवाबदेही तो थी।”


निष्कर्ष: संतुलित नीति की जरूरत

भारत में ऑनलाइन मनी गेम्स का मामला आसान नहीं है।

  • एक ओर लाखों परिवार कर्ज और मानसिक संकट से जूझ रहे हैं।
  • दूसरी ओर लाखों रोजगार और अरबों का निवेश दांव पर लगा है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण पाबंदी से ज्यादा असरदार तरीका सख्त रेग्युलेशन और जागरूकता है।

सरकार और इंडस्ट्री के बीच अगर संवाद हो और संतुलित नीति बनाई जाए तो शायद न लोगों की जिंदगी बर्बाद होगी और न ही इंडस्ट्री पूरी तरह खत्म होगी।

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