ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में घमासान, उधर ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड सुलेमान शाह मारा गया
नई दिल्ली/जम्मू-कश्मीर: देश की संसद में सोमवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर तीखी बहस चल रही है। इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने आतंकी गतिविधियों के खिलाफ एक निर्णायक रुख अपनाया है। वहीं दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ऑपरेशन महादेव के तहत सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले के मुख्य आरोपी और वांछित आतंकी सुलेमान शाह को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर को हाल ही में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक गोपनीय और रणनीतिक सैन्य अभियान माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य सीमापार से संचालित आतंकवाद, फंडिंग नेटवर्क और आतंकी घुसपैठ को जड़ से खत्म करना है। इस ऑपरेशन के तहत कई राज्यों में कार्रवाई हो चुकी है और कुछ हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां भी हुई हैं। संसद में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गर्मागर्म बहस देखने को मिली, जहां सरकार ने इस ऑपरेशन को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम’ बताया।
संसद में क्या हुआ?
लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में आज ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की गई। केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि यह ऑपरेशन आतंकवाद के नेटवर्क को तोड़ने के लिए शुरू किया गया है, खासकर उन गिरोहों के खिलाफ जो धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे हैं। विपक्ष ने इस ऑपरेशन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया, लेकिन सरकार ने दावा किया कि कार्रवाई पूरी तरह तथ्यों और जांच पर आधारित है।
ऑपरेशन महादेव में बड़ी सफलता, मारा गया सुलेमान शाह
इसी बीच, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी आतंकवाद विरोधी कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह ऑपरेशन महादेव के तहत एक खुफिया सूचना के आधार पर सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया।
मुठभेड़ अनंतनाग जिले के एक घने जंगल क्षेत्र में हुई। करीब दो घंटे चली इस मुठभेड़ में सुलेमान शाह नामक आतंकवादी को मार गिराया गया, जो कुछ महीने पहले हुए पहलगाम हमले का मुख्य साजिशकर्ता था। सुलेमान शाह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था और सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लंबे समय से तलाश थी।
कौन था सुलेमान शाह?
सुलेमान शाह कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों का एक अहम चेहरा बन चुका था। वह कई बड़े हमलों में शामिल रहा था, जिनमें सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले, स्थानीय युवाओं को आतंकवाद में शामिल करना और पाकिस्तान से आने वाले हथियारों की सप्लाई जैसे गंभीर आरोप थे। पहलगाम हमले में सेना के तीन जवान शहीद हुए थे और उसके बाद से ही सुलेमान शाह की तलाश तेज कर दी गई थी।
ऑपरेशन महादेव की रणनीति
‘ऑपरेशन महादेव’ जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों का चलाया गया विशेष अभियान है। इसका उद्देश्य न केवल सक्रिय आतंकियों का सफाया करना है, बल्कि उन स्थानीय नेटवर्क को भी तोड़ना है जो आतंकियों को पनाह और संसाधन मुहैया कराते हैं।
इस ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक, ड्रोन निगरानी, खुफिया एजेंसियों का समन्वय और स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाली जैसे कई उपाय अपनाए जा रहे हैं।
सरकार का बयान
सुरक्षा एजेंसियों की इस सफलता पर रक्षा मंत्री और गृह मंत्री दोनों ने बयान जारी कर कहा है कि, “यह भारत की सुरक्षा नीति की दृढ़ता और आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम है। हम हर उस शख्स को खत्म करेंगे जो भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ काम करता है।”
निष्कर्ष
जहां एक ओर संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर तीखी बहस जारी है, वहीं जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने ‘ऑपरेशन महादेव’ के जरिए देश को एक और बड़ी कामयाबी दिलाई है। सुलेमान शाह जैसे कुख्यात आतंकी का खात्मा यह साफ संकेत देता है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक मोड में है।
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