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‘इस्लाम भारत में है और आगे भी रहेगा’: मोहन भागवत के भाषण की पांच बड़ी बातें

आरएसएस के 100 वर्ष पूरे: मोहन भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2025। आरएसएस 100 वर्ष मोहन भागवत भाषण दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। संघ प्रमुख ने इस मौके पर इस्लाम, घुसपैठ, बीजेपी और संघ के रिश्ते, रिटायरमेंट और जनसंख्या जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर राजधानी दिल्ली में 26 से 28 अगस्त तक तीन दिवसीय विशेष आयोजन किया गया। गुरुवार को इस कार्यक्रम का समापन हुआ, जहां संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

भागवत ने अपने संबोधन में इस्लाम, घुसपैठ, संघ और बीजेपी के रिश्ते, रिटायरमेंट, त्योहारों में खानपान और जनसंख्या नीति जैसे मुद्दों पर खुलकर विचार व्यक्त किए। उनके बयान देशभर में चर्चा का विषय बन गए।

आइए जानते हैं उनके भाषण की प्रमुख बातें—


1. इस्लाम और भारतीय समाज

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत में इस्लाम की मौजूदगी नई नहीं है। उन्होंने कहा:

“इस्लाम जब भारत आया, तभी से यह यहां का हिस्सा है और आगे भी रहेगा। इस्लाम नहीं रहेगा यह सोच हिंदू दृष्टिकोण नहीं हो सकता। हिंदू सोच समावेशी है। संघर्ष तभी खत्म होगा जब दोनों ओर विश्वास कायम होगा और यह मान लिया जाएगा कि हम सब एक हैं।”

भागवत ने यह भी कहा कि भारत के मुसलमान भी हमारे नागरिक हैं। उन्हें सम्मान और रोज़गार मिलना चाहिए, लेकिन जो बाहर से घुसपैठ कर आते हैं, उन्हें यहां जगह देने की ज़रूरत नहीं है।

उनका कहना था कि “देश के भीतर रहने वाले मुसलमानों को रोज़गार देना ज़रूरी है, लेकिन जो अवैध रूप से सीमा पार से आए हैं, उनकी जिम्मेदारी उनके देश की है।”


2. रिटायरमेंट पर विचार

संघ प्रमुख से पूछा गया कि क्या 75 साल की उम्र के बाद राजनीति या जिम्मेदारियों से रिटायर हो जाना चाहिए?

इसके जवाब में भागवत ने कहा कि उन्होंने केवल पूर्व वरिष्ठ नेता मोरोपंत पिंगले के विचारों का हवाला दिया था।

उन्होंने कहा:

“मैंने ऐसा कभी नहीं कहा कि मैं या कोई और 75 की उम्र में रिटायर हो जाएगा। संघ के लिए हम हर समय काम करने के लिए तैयार हैं। जब तक संगठन चाहेगा, हम योगदान देते रहेंगे। जीवन का हर क्षण राष्ट्र और समाज सेवा के लिए है।”


3. बीजेपी और संघ के रिश्ते

मोहन भागवत ने संघ और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच संबंधों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह केवल मौजूदा सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि हर सरकार के साथ संघ का अच्छा संवाद और समन्वय रहा है।

उन्होंने कहा:

“संघ और बीजेपी के बीच झगड़े जैसी कोई बात नहीं है। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं। हम दोनों अपने-अपने दायरे में काम करते हैं। सरकार का काम सरकार करती है और संघ का काम संघ करता है। सलाह देना अलग बात है, लेकिन निर्णय लेना उनका क्षेत्र है।”

भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह धारणा गलत है कि बीजेपी सरकार में संघ हर निर्णय लेता है। उन्होंने कहा, “अगर सब कुछ संघ ही तय करता तो काम इतने वर्षों में पूरा हो भी पाता क्या? सरकार अपने स्तर पर फैसले करती है, संघ अपने स्तर पर।”


4. आरएसएस का विरोध और परिवर्तन

संघ प्रमुख ने अपने भाषण में उन नेताओं का भी ज़िक्र किया जो कभी आरएसएस के विरोधी रहे लेकिन बाद में उनके विचार बदले।

उन्होंने कहा:

  • 1948 में जयप्रकाश नारायण स्वयं संघ का कार्यालय जलाने के लिए मशाल लेकर निकले थे।
  • लेकिन आपातकाल (Emergency) के दौरान उन्होंने माना कि “देश में परिवर्तन की आशा संघ से ही है।”

भागवत ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों महान व्यक्ति संघ के कार्यक्रमों में आए, अपने विचारों पर अडिग रहे, लेकिन संघ को लेकर जो भ्रांतियां थीं, वे दूर हो गईं।


5. त्योहारों में खानपान और संवेदनशीलता

मोहन भागवत ने धार्मिक त्योहारों के समय मांसाहार पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा:

“व्रत और त्योहारों के दौरान लोग शाकाहारी रहना चाहते हैं। ऐसे समय यदि उनके सामने मांसाहार का दृश्य आए तो भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। यह केवल दो-तीन दिनों की बात होती है, इसलिए ऐसे समय संवेदनशीलता दिखाते हुए परहेज़ करना चाहिए। तब कानून बनाने की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी।”


6. जनसंख्या और बच्चों की संख्या

संघ प्रमुख ने देश की जनसंख्या नीति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत को नियंत्रित और संतुलित जनसंख्या की ज़रूरत है।

भागवत ने कहा:

“हर नागरिक के तीन बच्चे होने चाहिए। तीन से ज़्यादा नहीं। यह देश की ज़रूरत है। हमारी पॉलिसी औसतन 2.1 बच्चों की है, लेकिन व्यावहारिक रूप से 3 बच्चे ही सही संख्या है।”

उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग समुदायों में जन्म दर में कमी आ रही है। हिंदुओं में जन्मदर पहले से कम थी और अब और घट रही है। जबकि दूसरे समुदायों की जन्मदर भी अब धीरे-धीरे कम हो रही है।


निष्कर्ष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित इस कार्यक्रम में मोहन भागवत का भाषण कई स्तरों पर महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि—

  • इस्लाम भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
  • घुसपैठियों को रोकना होगा, लेकिन देश के मुसलमान नागरिक बराबरी के हकदार हैं।
  • संघ और बीजेपी के रिश्ते सहयोग और विश्वास पर आधारित हैं।
  • त्योहारों पर संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
  • और भारत की जनसंख्या नीति संतुलित रहनी चाहिए।

भागवत के इन बयानों से यह संदेश गया कि संघ समाज के हर वर्ग को जोड़ने और देश के विकास की दिशा तय करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

Image source – BBC NEWS

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