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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ उतरा बॉलीवुड, जॉन अब्राहम ने CJI को लिखा खत — दिए समाधान के सुझाव

दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्ते फैसला दिल्ली-NCR के लिए बड़ा विवाद बन गया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी स्ट्रे डॉग्स को पकड़कर शेल्टर होम में रखा जाए, जिससे डॉग लवर्स और बॉलीवुड सेलेब्स में नाराज़गी फैल गई है। NCR में आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने डॉग लवर्स और फिल्म इंडस्ट्री दोनों को चौंका दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सभी स्ट्रे डॉग्स को पकड़कर शेल्टर होम में रखा जाए और उन्हें वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए। इसके लिए 8 हफ्तों की समय सीमा भी तय की गई है। साथ ही, आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि इस अभियान में बाधा डालने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी।

इस आदेश ने सोशल मीडिया और पब्लिक प्लेटफॉर्म पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कई बॉलीवुड सेलिब्रिटी और एनिमल लवर्स इस फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं।


जॉन अब्राहम का सीधा संदेश CJI को

बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम, जो लंबे समय से एनिमल राइट्स को लेकर सक्रिय रहे हैं, ने इस मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी आर गवई को एक खुला पत्र लिखा है। जॉन ने पत्र में स्पष्ट कहा है कि आवारा कुत्तों को ‘सामुदायिक कुत्ते’ समझा जाना चाहिए, न कि समाज के लिए खतरा।

जॉन ने लिखा —

“ये कुत्ते हमारी कम्युनिटी का हिस्सा हैं। कई लोग उन्हें खाना खिलाते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं। खासकर दिल्ली में लोग इन्हें स्ट्रे नहीं, बल्कि सोसाइटी के साथी समझते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह आदेश पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control – ABC) नियम 2023 और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के बिल्कुल विपरीत है। ABC नियम के अनुसार, कुत्तों को शेल्टर होम में कैद करने के बजाय उनकी नसबंदी और टीकाकरण कर उन्हें उसी इलाके में वापस छोड़ना चाहिए, जहां वे पहले रहते थे।


जयपुर और लखनऊ का उदाहरण

अपने पत्र में जॉन अब्राहम ने जयपुर और लखनऊ शहरों का उदाहरण देते हुए बताया कि सही प्लानिंग से यह समस्या हल की जा सकती है।

  • जयपुर में 70% से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है।
  • लखनऊ में यह आंकड़ा 84% तक पहुंच चुका है।

उन्होंने समझाया कि नसबंदी के साथ ही कुत्तों को रेबीज का टीका लगाया जाता है, जिससे वे शांत हो जाते हैं, झगड़े और काटने के मामले कम हो जाते हैं, और नए पिल्ले पैदा नहीं होते। इसके अलावा, जो सामुदायिक कुत्ते एक इलाके में रहते हैं, वे अपने इलाके में बाहर से आने वाले बिना टीकाकरण और बिना नसबंदी वाले कुत्तों को आने से भी रोकते हैं, जिससे बीमारी और हमलों के खतरे घट जाते हैं।


अन्य सेलेब्स भी उतरे समर्थन में

जॉन अब्राहम के अलावा कई बड़े फिल्मी सितारों ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर नाराज़गी जताई है।

  • रवीना टंडन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह फैसला बिना सोचे-समझे लिया गया है और इससे कुत्तों के साथ-साथ इंसानों को भी नुकसान होगा।
  • जान्हवी कपूर और वरुण धवन ने भी अपने इंस्टाग्राम और ट्विटर अकाउंट्स पर इस फैसले का विरोध किया और इसे अनुचित बताया।

सेलेब्स का कहना है कि यह आदेश न केवल कुत्तों के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे समाज में इंसान और जानवर के बीच के भरोसे और सह-अस्तित्व की भावना को भी चोट पहुंचेगी।


डॉग लवर्स का तर्क

डॉग लवर्स का कहना है कि अचानक से सभी कुत्तों को सड़कों से हटाना न तो मानवीय है और न ही व्यावहारिक।

  • कुत्ते अपने इलाके को पहचानते हैं और वहां के लोगों के आदी होते हैं।
  • उन्हें अचानक किसी शेल्टर में ले जाने से उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
  • इससे सड़कों पर चूहे और अन्य हानिकारक जानवरों की संख्या भी बढ़ सकती है, क्योंकि कई जगह कुत्ते उन्हें नियंत्रित रखते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों के हमलों और काटने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह 8 हफ्तों में इस काम को पूरा करे और किसी भी कुत्ते को वापस सड़क पर न छोड़ा जाए।


अब आगे क्या?

इस पूरे मामले में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश की समीक्षा करेगा या नहीं। जॉन अब्राहम और अन्य सेलेब्स की अपील ने निश्चित रूप से इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

एनिमल एक्टिविस्ट्स का मानना है कि नसबंदी + टीकाकरण + कम्युनिटी मैनेजमेंट ही इसका स्थायी समाधान है, जबकि सभी कुत्तों को शेल्टर होम में कैद करना न तो संभव है और न ही यह इंसानियत के सिद्धांतों के अनुरूप है।


निष्कर्ष:
दिल्ली-NCR के आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने एक बड़े सामाजिक और मानवीय बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य का सवाल है, तो दूसरी तरफ जानवरों के अधिकार और सह-अस्तित्व की परंपरा। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे कानूनी और सामाजिक स्तर पर कौन सा रास्ता अपनाया जाता है

image source- social media

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