Ganpati Bappa Morya: देशभर में गूंजे बप्पा के जयकारे, गणेश चतुर्थी पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने दी शुभकामनाएं
Ganpati Bappa Morya!
पूरे देश में बुधवार से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। महाराष्ट्र समेत भारत के हर राज्य में श्रद्धालु बड़े उत्साह और भक्ति भाव से विघ्नहर्ता गणपति बप्पा की स्थापना कर रहे हैं। सुबह से ही मंदिरों, घरों और पंडालों में “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया” के जयकारे गूंज रहे हैं।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने दी शुभकामनाएं
गणेश चतुर्थी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को हार्दिक बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर उन्होंने लिखा कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए। पीएम मोदी ने प्रार्थना की कि भगवान गणेश सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने संदेश में कहा कि भगवान गणेश की कृपा से देशवासी राष्ट्र निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के पथ पर आगे बढ़ते रहें। उन्होंने गणेश चतुर्थी को बुद्धि और विवेक के देवता की उपासना का पर्व बताया।
मुंबई का उल्लास – लालबागचा राजा का अनावरण
गणेशोत्सव का नाम आते ही मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा का जिक्र जरूरी है। इस साल भी रविवार को लालबागचा राजा का पहला दर्शन भक्तों के लिए जारी किया गया। बेजोड़ कलात्मकता से बनी यह प्रतिमा न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है बल्कि मुंबई की आस्था, संस्कृति और भावनाओं का प्रतीक है।
लाखों लोग हर साल इस प्रतिमा के दर्शन के लिए आते हैं। 1934 में स्थापित लालबागचा राजा को कांबली परिवार पिछले 80 सालों से संभाल रहा है। यह गणपति प्रतिमा केवल मूर्ति नहीं बल्कि सामूहिक भक्ति और कला का अद्भुत उदाहरण है।

महाराष्ट्र सरकार ने दिया “राज्य उत्सव” का दर्जा
इस साल महाराष्ट्र सरकार ने गणेशोत्सव को “महाराष्ट्र राज्य उत्सव” घोषित किया। विधानसभा में सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने बताया कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा शुरू की थी। यह केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि समाज को एकजुट करने का भी माध्यम है।
मंदिरों और पंडालों में उमड़ी भीड़
देशभर के मंदिरों में गणेश चतुर्थी के अवसर पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में भक्तों ने विशेष पूजा-अर्चना की। लोगों ने घरों में गणपति बप्पा की स्थापना कर व्रत-उपवास रखा और पारंपरिक व्यंजन तैयार किए।
पंडालों को खूबसूरती से सजाया गया है, जहां भक्ति संगीत, आरती और नृत्य का आयोजन हो रहा है। लाखों श्रद्धालु अपने-अपने शहरों में बप्पा के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

विदेशों में भी गणेशोत्सव की धूम
गणपति बप्पा की भक्ति केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दुबई और कई अन्य देशों में बसे भारतीय समुदाय भी गणेश चतुर्थी को पूरे उत्साह से मना रहे हैं। प्रवासी भारतीय पंडाल सजाकर, भजन-कीर्तन और आरती करके अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी या विनायक चविथी भी कहते हैं, नई शुरुआत और शुभ कार्यों का प्रतीक है। मान्यता है कि किसी भी शुभ काम से पहले भगवान गणेश की पूजा करने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
इस पर्व का सांस्कृतिक महत्व भी गहरा है। यह उत्सव लोगों को आपस में जोड़ता है, समाज में एकता और भाईचारा बढ़ाता है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई इस पर्व का हिस्सा बनता है।
उत्सव की झलक
- हर गली और मोहल्ले में छोटे-बड़े पंडाल सजाए गए हैं।
- घरों में गणपति बप्पा की स्थापना के साथ परिवारजन भजन-कीर्तन और पूजा कर रहे हैं।
- बाजारों में सजावट की सामग्री, मूर्तियां और मिठाइयों की रौनक बढ़ गई है।
- विशेष रूप से महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस पर्व का भव्य आयोजन होता है।
मोदक का महत्व
गणपति बप्पा को मोदक प्रिय है। इसलिए इस पर्व पर खासतौर से मोदक, लड्डू और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। भक्त बप्पा को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में इसे सभी के बीच वितरित करते हैं।
पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव
पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल जल प्रदूषण कम होता है बल्कि प्रकृति की रक्षा भी होती है। सरकार और सामाजिक संगठनों की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि मिट्टी से बनी मूर्तियों का ही विसर्जन करें।
निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह एक सांस्कृतिक आंदोलन भी है। यह हमें परंपरा, आस्था, कला और एकता की शक्ति का अनुभव कराता है। आज जब देशभर में “Ganpati Bappa Morya” की गूंज सुनाई दे रही है, तब हर दिल यही प्रार्थना कर रहा है –
“हे विघ्नहर्ता गणपति बप्पा, सभी भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का संचार करें।”

