नाग पंचमी का महत्व: पौराणिक कथा, पूजा विधि और आध्यात्मिक संदेश
नाग पंचमी का महत्व भारत की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और नाग देवताओं की पूजा के लिए समर्पित होता है.. भारतवर्ष में मनाए जाने वाले हर पर्व के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक, पौराणिक या सामाजिक भावना अवश्य छिपी होती है। इन्हीं पावन त्योहारों में से एक है — नाग पंचमी। यह पर्व श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और इसका संबंध नाग देवताओं की पूजा से होता है।
यह दिन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें प्रकृति, जीव-जंतुओं और पृथ्वी की जैव विविधता के प्रति जागरूकता का संदेश भी देता है।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
नाग पंचमी मुख्यतः सर्पों की पूजा का दिन है। हिंदू धर्म में नागों को दिव्य और पूजनीय प्राणी माना गया है। वे ना सिर्फ डर और मृत्यु के प्रतीक हैं, बल्कि शक्ति, रक्षा, और ऊर्जा के भी प्रतीक माने जाते हैं।
यह मान्यता है कि नागों की पूजा करने से:
- सर्प भय से मुक्ति मिलती है
- काल सर्प दोष जैसे ज्योतिषीय दोष से राहत मिलती है
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है
- शत्रु बाधाएं दूर होती हैं
पौराणिक कथा: नाग पंचमी का इतिहास
नाग पंचमी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा महाभारत काल की है। कथा के अनुसार:
राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई थी। उनके पुत्र राजा जनमेजय ने बदले की भावना से एक सर्प यज्ञ (सर्पसत्र) आयोजित किया। इस यज्ञ में जितने भी नाग थे, वे अग्नि में खिंचकर जलने लगे। इससे नाग वंश का संहार होने लगा।
तभी एक महान ऋषि आस्तिक मुनि ने उस यज्ञ को रोक दिया। उन्होंने जनमेजय को समझाया कि यह संहार उचित नहीं है और प्रकृति के संतुलन के लिए नागों का जीवित रहना आवश्यक है। राजा ने उनकी बात मानी और यज्ञ रोक दिया। उसी दिन को नाग पंचमी के रूप में याद किया जाता है।
नाग पंचमी का आध्यात्मिक संदेश
नाग पंचमी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, यह पर्व हमें गहराई से सोचने के लिए भी प्रेरित करता है:
- प्रकृति के साथ सामंजस्य:
सर्प पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाते हैं। वे चूहों और अन्य कीटों की जनसंख्या को नियंत्रित करते हैं। - जीवों के प्रति करुणा:
इस दिन सिखाया जाता है कि हर प्राणी — चाहे वह कितना भी डरावना क्यों न हो — उसका भी इस सृष्टि में स्थान है। - भय पर विजय:
नाग पंचमी मनाने का एक उद्देश्य यह भी है कि हम अपने मन के भय और अंधविश्वासों से ऊपर उठ सकें।
नाग पंचमी से जुड़ी मान्यताएं
- भगवान शिव के गले में वासुकि नाग लिपटे रहते हैं
- भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हैं
- शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा के वाहन में भी सर्प होते हैं
इस तरह, नाग देवता हर प्रमुख देवता के साथ जुड़े हुए हैं, जिससे उनका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
पूजा का महत्व
नाग पंचमी के दिन लोग नाग देवता की पूजा करते हैं। घर की दीवार पर नाग का चित्र बनाकर या मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है। दूध, अक्षत, फूल, दूर्वा, कुशा, और रोली अर्पित की जाती है।
मंत्र जाप:
“नमः नागाय शेषाय वासुकये नमो नमः।”
इससे व्यक्ति को सर्प दोष, बुरी शक्तियों और मानसिक भय से मुक्ति मिलती है।
आज के दौर में ज़रूरी सावधानी
पहले के समय में नागों को ज़बरदस्ती पकड़कर दूध पिलाया जाता था। यह परंपरा आज के पर्यावरणीय दृष्टिकोण से हानिकारक और अमानवीय मानी जाती है। इसलिए आज नाग पंचमी के दिन प्रतीकात्मक पूजा को महत्व दिया जाता है — जीवों को कष्ट देने के बजाय प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया जाता है।
प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
नाग पंचमी का पर्व हमें प्रकृति से जुड़ाव और सभी जीवों के सम्मान की प्रेरणा देता है। सर्पों को हानि पहुँचाना पाप माना जाता है। इस दिन हम यह संकल्प भी लेते हैं कि हम प्रकृति और जैव विविधता की रक्षा करेंगे।
निष्कर्ष
नाग पंचमी केवल नागों की पूजा नहीं है, बल्कि यह सभी जीवों के प्रति श्रद्धा, करुणा और सह-अस्तित्व का प्रतीक पर्व है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सृष्टि का हर प्राणी महत्वपूर्ण है — चाहे वह शक्तिशाली हो या डरावना।
आज के समय में नाग पंचमी का सही अर्थ यही है कि हम प्रकृति के हर अंग का सम्मान करें, और जीवन को शुद्ध, सरल और संतुलित बनाएं।

