शादी रात में करनी चाहिए या दिन में, सच जानकर आप चौंक जाएंगे!
आजकल अधिकतर विवाह रात में होते हैं। लेकिन सवाल यह है – शादी रात में करनी चाहिए या दिन में करना ज्यादा शुभ है? इस लेख में हम शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार इसका सही समय जानेंगे।
आजकल अधिकतर विवाह रात में होते हैं। लेकिन सवाल यह है – शादी रात में करनी चाहिए या दिन में करना ज्यादा शुभ है अधिकतर विवाह रात में किए जाते हैं। लेकिन क्या यह शास्त्रसम्मत है? क्या शादी रात में करनी चाहिए या दिन में करना अधिक शुभ है? इस लेख में हम जानेंगे कि शास्त्र, ज्योतिष और सामाजिक दृष्टिकोण से दोनों समय विवाह का महत्व क्या है।

दिन या रात – विवाह का सही समय क्या है?
“रात का विवाह शास्त्रसम्मत है या नहीं?” यह सवाल कई लोगों के मन में आता है। आधुनिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो दोनों समय विवाह शास्त्र के अनुसार सही हैं।
हम बचपन से यही सुनते आए हैं कि राम और सीता का विवाह दिन में हुआ था और शिव–पार्वती का विवाह भी दिन में सम्पन्न हुआ। लेकिन आज अधिकतर शादी समारोह रात में होते हैं।
राम और शिव के विवाह का रहस्य
वाल्मीकि रामायण में लिखा है कि राम और सीता का विवाह मध्यान्ह में हुआ था। बालकाण्ड, सर्ग 73 में उल्लेख मिलता है:
“ततो वैवाहिकं कृत्यम् जनकेन महात्मना। रामादिभिः कृतं सर्वं ब्राह्मणैः वेदपारगैः॥”
शिव–पार्वती के विवाह का वर्णन भी शिव पुराण में दिन के समय मिलता है। उस समय यज्ञ, अग्नि साक्ष्य और सूर्य को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। यही कारण था कि प्राचीन समय में विवाह दिन में करना उचित माना जाता था।
शास्त्र क्या कहते हैं?
आज के समय में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रात में विवाह करना गलत है। शास्त्रों में इसका स्पष्ट उत्तर है – नहीं।
- आश्वलायन गृह्यसूत्र में बताया गया है कि विवाह दिन या रात दोनों में किया जा सकता है, बशर्ते ग्रह और नक्षत्र अनुकूल हों।
- मनुस्मृति में कहा गया है कि विवाह केवल शुभ मुहूर्त और चंद्रमा की अनुकूल स्थिति में होना चाहिए।
- नारद पुराण में उल्लेख है कि यदि विवाह रात के शुभ समय पर होता है तो दंपत्ति को सुख और दीर्घायु प्राप्त होती है।
मतलब यह कि शास्त्र रात के विवाह को पूरी तरह मान्यता देते हैं।
ज्योतिष का दृष्टिकोण
ज्योतिष के अनुसार विवाह के लिए वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और मीन लग्न श्रेष्ठ माने जाते हैं। ये लग्न अक्सर रात के समय अधिक अनुकूल होते हैं।
- विवाह का मुख्य कारक: ग्रह चंद्रमा
- दांपत्य सुख का कारक: ग्रह शुक्र
दिन में राहुकाल, यमगंड और गुलिक जैसे काल बाधक हो सकते हैं। इसलिए कई बार पंडित और ज्योतिषाचार्य रात्रि के मुहूर्त का सुझाव देते हैं।
सामाजिक और व्यवहारिक कारण
- भारत कृषि प्रधान देश रहा है। दिन में अधिकतर लोग खेतों या काम-काज में व्यस्त रहते थे।
- रात का समय अधिक सुविधाजनक हो गया क्योंकि तब परिवार और रिश्तेदार आसानी से शामिल हो सकते थे।
- ठंडी रात और रोशनी विवाह समारोह के लिए आरामदायक और आकर्षक होती है।
- आजकल शादी केवल संस्कार नहीं, बल्कि सामाजिक उत्सव और व्यवसाय भी बन गया है। होटल, मैरिज हॉल, सजावट और फोटोग्राफी रात के विवाह से ही अधिक प्रभावशाली होते हैं।
दिन और रात का शास्त्रसम्मत महत्व
- दिन का विवाह: यज्ञ, अग्नि साक्ष्य और देवताओं का आह्वान मुख्य
- रात का विवाह: नक्षत्रों की अनुकूलता, ग्रह स्थिति और सामाजिक सुविधा
राम और शिव का विवाह दिन में हुआ क्योंकि उस समय यज्ञीय परंपरा महत्वपूर्ण थी।
आज रात का विवाह इसलिए अधिक प्रचलित है क्योंकि शुभ नक्षत्र, ग्रह और सामाजिक सुविधा रात में अधिक मिलती हैं।
शास्त्र कभी भी रात में विवाह को अशुभ नहीं मानते। केवल यह ध्यान रखना आवश्यक है कि विवाह शुभ मुहूर्त और अनुकूल नक्षत्र में सम्पन्न हो।
FAQs
Q1. क्या रात का विवाह अशुभ है?
नहीं। शास्त्र और ज्योतिष दोनों इसे मान्यता देते हैं।
Q2. दिन का विवाह क्या आज भी होता है?
हां। दक्षिण भारत और कुछ परंपराओं में दिन में विवाह करना आज भी परंपरा है।
Q3. रात्रिकालीन विवाह कब से शुरू हुआ?
मुख्यतः मध्यकाल से, जब कृषि और सामाजिक कारणों से रात का समय सुविधाजनक हो गया।
निष्कर्ष
दिन और रात दोनों समय में विवाह करना शास्त्रसम्मत है। फर्क केवल परिस्थितियों और आवश्यकताओं में है।
आज रात के विवाह का चलन सुविधा, ज्योतिष और आधुनिक सामाजिक परिप्रेक्ष्य का परिणाम है।
