राजनीति

सी पी राधाकृष्णन कौन हैं जिन्हें एनडीए ने बनाया उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया

“एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति उम्मीदवार 2025 के रूप में घोषित किए हैं।” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। फिलहाल वे महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत हैं। उनकी उम्मीदवारी की औपचारिक घोषणा भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की।

जेपी नड्डा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगाई गई। अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कौन हैं सी.पी. राधाकृष्णन और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है।


सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर

चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन (सी.पी. राधाकृष्णन) लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं। वे संगठन के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं और दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा, वे पार्टी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

राधाकृष्णन दक्षिण भारत में भाजपा के संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले नेताओं में से एक रहे हैं। उन्होंने कोयंबटूर संसदीय सीट से 1998 और 1999 में लगातार दो बार जीत दर्ज की। हालांकि, इसके बाद उन्हें 2004, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।


राज्यपाल के रूप में कार्यकाल

फ़रवरी 2023 में राधाकृष्णन को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उन्हें तेलंगाना के राज्यपाल और पुदुच्चेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। बाद में जुलाई 2024 में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल बने।


छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति तक

सी.पी. राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्तूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में हुआ। उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की पढ़ाई की। युवावस्था में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और फिर सक्रिय राजनीति में आए।

1974 में वे भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने। 1996 में उन्हें तमिलनाडु में भाजपा का सचिव नियुक्त किया गया और उसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए।


भाजपा संगठन और अभियान

2007 में तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 93 दिनों की एक लंबी रथ यात्रा निकाली। इस दौरान उन्होंने लगभग 19,000 किलोमीटर की दूरी तय की और ‘नदी जोड़ो’, ‘आतंकवाद’, ‘समान नागरिक संहिता’, ‘अस्पृश्यता’ और ‘नशे के दुष्परिणाम’ जैसे सामाजिक मुद्दों पर जनता को जागरूक किया।


संसदीय भूमिकाएँ और उपलब्धियाँ

लोकसभा सांसद रहते हुए राधाकृष्णन संसदीय स्थायी समिति (कपड़ा मंत्रालय) के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा वे स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच के लिए बनी विशेष संसदीय समिति में भी शामिल थे।

साल 2004 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में भाषण दिया। वे ताइवान जाने वाले पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी रहे।

2016 में उन्हें कोच्चि स्थित कॉयर बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में भारत से नारियल रेशा (Coconut Fibre) का निर्यात रिकॉर्ड स्तर यानी 2532 करोड़ रुपये तक पहुंचा।

2020 से 2022 तक वे भाजपा के केरल प्रभारी रहे।


उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव परोक्ष होता है। इसके लिए निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्य शामिल होते हैं।

राष्ट्रपति चुनाव से अलग, इसमें विधायक भाग नहीं लेते। दिलचस्प बात यह है कि दोनों सदनों के मनोनीत सांसद उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट डाल सकते हैं, जबकि राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें यह अधिकार नहीं होता।

चुनाव प्रक्रिया के अनुसार –

  • उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने हेतु उम्मीदवार के पास 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक होने चाहिए।
  • नामांकन दाखिल करते समय 15,000 रुपये की राशि भी जमा करनी पड़ती है।
  • निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करता है और योग्य उम्मीदवारों के नाम ही बैलट में शामिल होते हैं।

योग्यता की शर्तें भी तय हैं। उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना अनिवार्य है। उसकी उम्र 35 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और वह राज्यसभा के सदस्य बनने के योग्य होना चाहिए।


चुनाव कार्यक्रम

निर्वाचन आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए तारीखें घोषित कर दी हैं।

  • नामांकन भरने की आखिरी तारीख: 21 अगस्त
  • मतदान की तिथि: 9 सितंबर
  • नतीजों की घोषणा: 9 सितंबर को ही की जाएगी।

निष्कर्ष

सी.पी. राधाकृष्णन का नाम भाजपा और एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में सामने आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनकी लंबी पारी और दक्षिण भारत में भाजपा को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका ने उन्हें यह अवसर दिलाया है। अब सबकी नजरें 9 सितंबर को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं।

image source- BBC NEWS

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