राजनीति

जगदीप धनखड़ इस्तीफा कारण: बीमारी या सत्ता का टकराव?

नई दिल्ली।
देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक दिए गए इस्तीफे ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताया है, लेकिन इसके पीछे छिपे राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए इसे सिर्फ बीमारी से जुड़ा मामला मानने से इनकार कर दिया है। वहीं गांववालों और करीबी रिश्तेदारों ने भी इस फैसले को चौंकाने वाला बताया है।

क्या इस्तीफे से पहले हुई किसी ‘कॉल’ ने बदली तस्वीर?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफे से ठीक पहले जगदीप धनखड़ को केंद्र सरकार की ओर से एक फोन कॉल आया था। इसी कॉल के बाद कथित तौर पर दोनों पक्षों में बहस हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, धनखड़ ने कुछ हालिया मुद्दों पर केंद्र की मंशा के खिलाफ जाकर निर्णय लिए थे, जिससे सरकार असहज महसूस कर रही थी। खासकर जब उन्होंने जस्टिस वर्मा को हटाने के खिलाफ विपक्ष के नोटिस को स्वीकार करते हुए कार्रवाई की, तब केंद्र की नाराजगी खुलकर सामने आ गई।

बताया जा रहा है कि फोन पर बातचीत के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि बाद में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी चर्चा शुरू हो गई थी। जब यह बात जगदीप धनखड़ को पता चली, तो उन्होंने तत्काल राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह इस्तीफा स्वेच्छा से लिया गया फैसला था, या फिर दबाव में उठाया गया कदम?

मानसून सत्र के पहले ही दिन उठा बवाल

21 जुलाई 2025 को मानसून सत्र का पहला दिन था, जब विपक्ष ने जस्टिस वर्मा को हटाने के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाया। इस दौरान जगदीप धनखड़ ने बतौर सभापति विपक्ष के प्रस्ताव को गंभीरता से लिया और सचिवालय को आवश्यक निर्देश भी दिए। कहा जा रहा है कि उनके इस फैसले से सत्ता पक्ष नाराज हो गया था, और यहीं से उनके इस्तीफे की पटकथा लिखी गई।

कांग्रेस ने खड़े किए गंभीर सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए कहा,

स्वास्थ्य कारणों पर गांववालों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

धनखड़ के गृह जिले राजस्थान के झुंझुनूं स्थित गांव में भी उनके इस्तीफे को लेकर चर्चा तेज है। गांववालों का कहना है कि वे लंबे समय से बीमार थे, लेकिन उनका अचानक इस्तीफा देना किसी को समझ में नहीं आ रहा। उनके रिश्तेदार हरेंद्र धनखड़ ने बताया कि मार्च में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी और हाल ही में उत्तराखंड यात्रा के दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी।

गांव की सरपंच सुभिता धनखड़ ने कहा कि,

“गांव वालों को उम्मीद थी कि जगदीप जी भविष्य में और भी ऊंचे पदों पर पहुंचेंगे। उनका इस्तीफा गांव के लिए बड़ी खबर है।”

एक ग्रामीण बुजुर्ग ने कहा,

“कम से कम उनका कार्यकाल पूरा होना चाहिए था। यह इस्तीफा हमारे लिए दुखद है।”

क्या आगे आएगा बड़ा खुलासा?

फिलहाल जगदीप धनखड़ की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई विस्तार से बयान नहीं आया है। न ही सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर कुछ स्पष्ट किया गया है। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस आरोप लगा रही है और खबरों में कॉल, बहस और प्रस्ताव की बातें सामने आ रही हैं — उससे एक बात तो तय है कि मामला सिर्फ ‘स्वास्थ्य’ तक सीमित नहीं है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि धनखड़ जैसे अनुभवी नेता का इस तरह अचानक इस्तीफा देना कहीं न कहीं गहरे मतभेद और शक्ति संघर्ष की ओर इशारा करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जगदीप धनखड़ इस्तीफा कारण सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं हो सकता। वे एक अनुभवी वकील और संवैधानिक प्रक्रिया को भलीभांति समझने वाले नेता हैं। उनके द्वारा विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकारना और कुछ संवेदनशील मुद्दों पर स्वतंत्र रुख अपनाना इस ओर संकेत करता है कि उनके और सत्ता पक्ष के बीच कुछ न कुछ मतभेद जरूर उभरे थे। आने वाले दिनों में अगर कोई आधिकारिक बयान या दस्तावेज सामने आता है, तो इस घटनाक्रम की सच्चाई और भी स्पष्ट हो सकती है।


Image source- ABP News

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