ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में 16 घंटे लंबी ऐतिहासिक बहस
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर आज (28 जुलाई 2025) लोकसभा में 16 घंटे लंबी और महत्वपूर्ण बहस होने जा रही है। यह बहस दोपहर 12 बजे से शुरू होगी, जिसमें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चर्चा की शुरुआत करेंगे। माना जा रहा है कि इस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हस्तक्षेप कर सकते हैं और देश को ऑपरेशन से जुड़ी रणनीति व सैन्य तैयारियों की विस्तृत जानकारी देंगे। यह बहस केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की सैन्य क्षमता, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में एक अहम पड़ाव बन चुकी है।
ऑपरेशन सिंदूर क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा मई 2025 में चलाया गया एक तेज और निर्णायक सैन्य अभियान था। इसकी शुरुआत 6-7 मई की रात को हुई, जिसका उद्देश्य 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब देना था। यह ऑपरेशन महज 22 मिनट में पूरा हुआ और इसमें 100 से अधिक आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। इस सैन्य कार्रवाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विजय उत्सव” करार दिया और इसे स्वदेशी रक्षा तकनीक और रणनीति की जीत बताया।
संसद में क्यों हो रही है बहस?
इस ऑपरेशन की सफलता और इसके प्रभावों को देखते हुए सरकार ने इसे संसद में चर्चा के लिए लाने का फैसला किया है। चर्चा से पहले रक्षा मंत्रालय द्वारा ऑपरेशन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज संसद में पेश किए जाएंगे। यह बहस लगभग 16 घंटे तक चलेगी, जिससे यह स्पष्ट है कि सरकार और विपक्ष दोनों इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहते हैं।
बहस की बड़ी तैयारी, सेना और सरकार की संयुक्त रणनीति
जानकारी के मुताबिक, इस अहम बहस से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने CDS जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ कई अहम बैठकें की हैं। इन बैठकों में लोकसभा में उठाए जा सकने वाले सवालों के जवाब और सरकार का पक्ष स्पष्ट करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
सरकार की तैयारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बहस से पहले CDS जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। इन बैठकों का मकसद संसद में उठने वाले हर संभावित सवाल का जवाब देने के लिए सरकार की रणनीति तय करना था। सरकार का जोर यह दिखाने पर है कि भारत अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि ठोस और निर्णायक कदम उठाता है।
विपक्ष की भूमिका
विपक्षी गठबंधन INDIA ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की पूरी योजना तैयार कर ली है। चर्चा से पहले विपक्षी दलों की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई है, जिसमें सवालों की रणनीति और एकजुट रुख तय किया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार पारदर्शिता के नाम पर जरूरी जानकारी छिपा रही है और ऑपरेशन को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहस के अंतिम चरण में हस्तक्षेप कर सकते हैं। वे ऑपरेशन की योजना, उद्देश्य, सफलता और इसके पीछे की सैन्य सोच पर विस्तार से जानकारी दे सकते हैं। पीएम मोदी देश को यह संदेश देना चाहेंगे कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कोई भी ढील नहीं बरतेगा और हर हमले का जवाब दुगनी ताकत से देगा।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर पर हो रही यह बहस भारत की संसदीय लोकतंत्र में सैन्य नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल बन सकती है। यह बहस केवल एक सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक छवि, सामरिक नीति और आंतरिक सुरक्षा के नए युग की शुरुआत है।
विपक्ष भी तैयार, INDIA गठबंधन की बैठक
दूसरी तरफ, विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन ने भी सरकार को घेरने की तैयारी पूरी कर ली है। विपक्ष लगातार सरकार से ऑपरेशन की पारदर्शिता, समय-चयन और उसके असर को लेकर जवाब मांग रहा है। इसी सिलसिले में बहस से ठीक पहले विपक्षी नेताओं की एक अहम बैठक हुई, जिसमें संयुक्त रणनीति और सवालों की सूची तैयार की गई।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में होने वाली बहस भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक मौका है, जहां देश की रक्षा नीतियों पर खुलकर चर्चा होगी। यह बहस केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि पूरे देश के सामने यह स्पष्ट करेगी कि भारत किस तरह अपनी सुरक्षा, सैन्य रणनीति और आतंक के खिलाफ लड़ाई में अग्रसर है।
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