राजनीति

एसएससी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज को लेकर राहुल गांधी ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

नई दिल्ली।SSC अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के मामले ने दिल्ली में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। रविवार को रामलीला मैदान में स्टाफ़ सिलेक्शन कमीशन (SSC) के छात्रों और शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन किया…” स्टाफ़ सिलेक्शन कमीशन (SSC) भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और बेरोज़गारी के मुद्दे को लेकर देशभर के अभ्यर्थियों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े शिक्षकों ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। लेकिन यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक उस समय विवाद का कारण बन गया, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने पूरी तरह से शांतिपूर्वक अपनी मांगें रखीं, लेकिन प्रशासन ने बल प्रयोग कर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की।

इस घटना ने विपक्षी दलों को भी सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे मोदी सरकार की “जनविरोधी सोच” और “डरपोक रवैये” की पहचान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर लंबी पोस्ट लिखकर कहा कि केंद्र सरकार युवाओं की समस्याओं से पूरी तरह बेपरवाह है और जो भी आवाज़ उठाता है, उसे बलपूर्वक कुचलने की कोशिश की जाती है।


राहुल गांधी का बयान: “यह सरकार डरपोक है”

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा –

“रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे एसएससी अभ्यर्थियों और शिक्षकों पर बर्बर लाठीचार्ज सिर्फ़ शर्मनाक ही नहीं, बल्कि यह एक डरपोक सरकार की पहचान है। युवाओं ने सिर्फ़ अपना हक़ मांगा था – रोज़गार और न्याय। लेकिन उन्हें मिला क्या? लाठियां। साफ़ है कि मोदी सरकार को न देश के युवाओं की चिंता है और न ही उनके भविष्य की।”

उन्होंने आगे लिखा कि वर्तमान सरकार जनता के भरोसे सत्ता में नहीं आई बल्कि “वोट चुराकर” देश पर शासन कर रही है। राहुल गांधी के मुताबिक –

“पहले ये वोट चुराते हैं, फिर परीक्षा चुराते हैं, फिर नौकरियां चुराते हैं और आखिर में जनता का हक़ और आवाज़ – दोनों को कुचल देते हैं। यही इस सरकार की असली पहचान है।”


“युवाओं का मुद्दा कभी सरकार की प्राथमिकता नहीं”

राहुल गांधी ने कहा कि इस सरकार के लिए युवाओं, किसानों, गरीबों, बहुजनों और अल्पसंख्यकों की समस्याएं किसी मायने नहीं रखतीं। उन्होंने लिखा –

“युवाओं ने जो सवाल उठाए, वे बिल्कुल जायज़ थे। एसएससी परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं। परिणाम समय पर नहीं आते, भर्ती प्रक्रिया अधर में लटक जाती है और लाखों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य खतरे में पड़ जाता है। ऐसे में जब छात्र आवाज़ उठाते हैं, तो सरकार संवाद करने के बजाय उन्हें लाठियों से चुप कराने का काम करती है। यह लोकतंत्र की हत्या है।”

उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि अब डरने का नहीं, बल्कि डटकर मुकाबला करने का समय है।


प्रियंका गांधी ने भी किया समर्थन

इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की गारंटी देना सरकार की जिम्मेदारी है।

“देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। एसएससी के छात्र अपनी जायज़ मांगों को लेकर सड़क पर उतरे थे, लेकिन उन्हें भी आवाज़ उठाने का अधिकार नहीं दिया गया। यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

प्रियंका गांधी ने मांग की कि अभ्यर्थियों के साथ हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।


छात्रों का आरोप: “न्याय मांगने पर मिली लाठियां”

प्रदर्शनकारी छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से एसएससी परीक्षाओं में हो रही कथित धांधलियों, पेपर लीक और भर्ती में देरी के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि कई वर्षों से अलग-अलग परीक्षाएं समय पर पूरी नहीं हो रही हैं। नतीजतन, लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब वे रविवार को शांतिपूर्ण ढंग से रामलीला मैदान में एकत्रित होकर अपनी मांगों को रखने पहुंचे, तभी पुलिस ने अचानक बल प्रयोग किया। छात्रों ने दावा किया कि कई प्रदर्शनकारी घायल भी हुए हैं।


विपक्ष ने घेरा, सरकार पर दबाव

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर युवाओं को बेरोज़गारी और भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं के मुद्दे से दूर भागने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने का समर्थन किया।

विपक्ष का कहना है कि सरकार को युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना चाहिए। सिर्फ़ बल प्रयोग करके असंतोष को दबाना किसी समाधान का रास्ता नहीं है।


निष्कर्ष

एसएससी अभ्यर्थियों पर हुआ यह लाठीचार्ज केवल एक प्रशासनिक घटना भर नहीं है, बल्कि यह बेरोज़गारी और भर्ती प्रणाली की खामियों को उजागर करता है। विपक्ष इसे सरकार की “युवा विरोधी नीति” बता रहा है, जबकि छात्रों का कहना है कि उनका भविष्य लगातार दांव पर लगाया जा रहा है।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों ने इस मामले को राष्ट्रीय मुद्दा बनाते हुए साफ़ कहा है कि अब युवाओं को डरने की बजाय अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज़ हो सकता है और सरकार पर इस मसले को लेकर दबाव और बढ़ेगा।

Image source- ANI

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