Donald Trump on Tariff: भारत-चीन पर और टैरिफ लगाएंगे? पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप का बयान
ट्रंप भारत चीन चेतावनी देते हुए बोले कि आने वाले समय में चीन की नीतियों को भारत और अमेरिका मिलकर जवाब देंगे। साथ ही रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नए टैरिफ लगाने का संकेत भी दिया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सख्त आर्थिक फैसलों को लेकर चर्चा में हैं। शनिवार (16 अगस्त 2025) को ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में उन देशों पर और टैरिफ लगाए जा सकते हैं, जो रूस से तेल खरीद रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि फिलहाल तुरंत कोई अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत नहीं है।
यह बयान तब आया है जब ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात की। इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि शायद उन्हें आने वाले दो से तीन हफ्तों में इस मुद्दे पर फिर से सोचना पड़ सकता है।
भारत और चीन पर बढ़ सकता है दबाव
ट्रंप का यह रुख सीधे तौर पर भारत और चीन जैसे देशों से जुड़ा है, जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं। अमेरिका लंबे समय से यह संदेश देता आ रहा है कि रूस से ऊर्जा खरीदकर देश अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को वित्तीय मदद दे रहे हैं।
ट्रंप ने पहले भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था, लेकिन कुछ ही समय बाद इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। इनमें से आधे शुल्क पहले ही लागू हो चुके हैं, जबकि बाकी 27 अगस्त से लागू होंगे। इससे भारतीय व्यापार पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
पुतिन से मुलाकात और टैरिफ पर विचार
फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा:
“आज जो हालात बने हैं, उसके बाद मुझे लगता है कि इस समय नए टैरिफ लगाने पर विचार करने की जरूरत नहीं है। लेकिन संभव है कि दो या तीन हफ्ते बाद स्थिति को देखकर कदम उठाना पड़े।”
उनका यह बयान इस ओर इशारा करता है कि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ती करने से पीछे नहीं हटेगा।
भारत पर पहले से 50% टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। यह फैसला रूस से तेल आयात और अन्य व्यापारिक मुद्दों को लेकर लिया गया। अमेरिका का तर्क है कि जो भी देश मॉस्को से बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहे हैं, उन्हें द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) झेलने पड़ सकते हैं।
ट्रंप ने यहां तक कहा था कि अगर रूस यूक्रेन युद्ध को समाप्त नहीं करता, तो मॉस्को पर 100 प्रतिशत टैरिफ भी लगाया जा सकता है। उन्होंने रूस को इसके लिए 50 दिनों की समयसीमा भी दी है।
अमेरिकी वित्त मंत्री की चेतावनी
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिए कि यदि अलास्का में हुई ट्रंप-पुतिन बैठक से सकारात्मक परिणाम नहीं निकले, तो भारत को और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में आरोप लगाया कि भारत व्यापार वार्ताओं में “अड़ियल रुख” दिखा रहा है। साथ ही यह भी कहा कि अगर भारत ने अपने स्टैंड में बदलाव नहीं किया, तो अतिरिक्त शुल्क लगाना मजबूरी बन सकता है।
भारत का जवाब
भारत ने कई बार स्पष्ट किया है कि उसका अमेरिका के साथ संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते बहुआयामी हैं और इन्हें किसी तीसरे पक्ष के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है और इस मामले में वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही निर्णय लेगा।
चीन पर भी निगाहें
ट्रंप का बयान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। चीन भी रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता है। अमेरिकी प्रशासन मानता है कि बीजिंग का यह कदम रूस को आर्थिक सहारा दे रहा है। इस वजह से आने वाले समय में चीन पर भी नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अगर अमेरिका भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों पर टैरिफ बढ़ाता है, तो इसका असर केवल इन देशों तक सीमित नहीं रहेगा।
- वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार युद्ध और गहरा सकता है।
- कई देशों की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक दबाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का ताज़ा बयान यह दिखाता है कि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नजर बनाए हुए है। भारत पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ का असर झेल रहा है और आने वाले दिनों में उस पर और दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि ट्रंप ने फिलहाल नए टैरिफ की आवश्यकता से इनकार किया है, लेकिन अगले 2–3 हफ्तों में स्थिति बदल सकती है। ऐसे में भारत और चीन जैसे देशों को अपने हितों और अमेरिका के दबाव के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।

