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ट्रंप भारत टैरिफ विवाद: 50% शुल्क पर मोदी सरकार की तीखी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली/वॉशिंगटन।

“ट्रंप भारत टैरिफ” विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50% आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है, जिसे भारत सरकार ने ‘अकारण और तर्कहीन’ करार दिया है। इस कदम से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नया तनाव पैदा हो गया है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और 2025 के संभावित उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत पर कुल 50 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ़) लगा दिया है। ट्रंप के हस्ताक्षर वाले कार्यकारी आदेश के मुताबिक, यह अतिरिक्त 25% शुल्क पहले से लागू 25% टैरिफ के साथ जुड़कर अगले 21 दिनों में प्रभावी हो जाएगा। भारत सरकार ने इस कदम को “अनुचित, अकारण और तर्कहीन” करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।


क्यों लगाया गया है अतिरिक्त टैरिफ?

व्हाइट हाउस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत सरकार रूस से सीधे या परोक्ष रूप से कच्चे तेल का आयात कर रही है, जो यूक्रेन युद्ध को ईंधन दे रहा है। इसी आधार पर अमेरिका ने भारत से आने वाले सभी उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत रूसी तेल को सस्ते में खरीदकर अन्य देशों को ऊंचे दामों पर बेच रहा है और मुनाफा कमा रहा है।


भारत का जवाब: ‘राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’

भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा:

“यह कार्रवाई अनुचित, अकारण और तर्कहीन है। भारत के तेल आयात का उद्देश्य 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे को पूरा करना।”

भारत ने यह भी कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ स्वयं भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, फिर भी भारत को निशाना बनाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।


टैरिफ का असर: भारतीय निर्यात पर मंडरा रहा संकट

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के प्रमुख अजय श्रीवास्तव का कहना है कि इस निर्णय के बाद भारत अमेरिका के सबसे अधिक टैरिफ झेलने वाले देशों में शामिल हो गया है।

संभावित प्रभाव:

  • भारतीय टेक्सटाइल, मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और दवाइयों के निर्यात पर असर पड़ेगा।
  • अमेरिका को भारत का 86.5 अरब डॉलर का सालाना निर्यात प्रभावित हो सकता है।
  • 40% से 50% तक की गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
  • MSME सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।

अजय श्रीवास्तव ने यह भी जोड़ा कि चीन ने 2024 में रूस से 62.6 अरब डॉलर का तेल आयात किया, जबकि भारत का आंकड़ा 52.7 अरब डॉलर रहा। बावजूद इसके, अमेरिका ने चीन पर कोई सख्ती नहीं दिखाई।


अमेरिका चीन से क्यों डरता है?

GTRI के अनुसार, अमेरिका चीन से गैलियम, जर्मेनियम, रेयर अर्थ और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण कच्चे पदार्थ आयात करता है जो उसकी रक्षा और तकनीकी जरूरतों के लिए बेहद जरूरी हैं। यही कारण है कि वॉशिंगटन चीन के खिलाफ कठोर कदम उठाने से परहेज करता है।

इसी तरह, यूरोपीय संघ ने 2024 में रूस से 39.1 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जिसमें 25.2 अरब डॉलर का तेल शामिल है, लेकिन अमेरिका ने उन पर कोई पाबंदी नहीं लगाई।


कांग्रेस और राहुल गांधी का हमला

अमेरिका के इस निर्णय को लेकर भारत की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।
कांग्रेस ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“मोदी के दोस्त ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ़ लगा दिया है, लेकिन मोदी जी ट्रंप का नाम तक नहीं लेते। क्या यही मित्रता है?”

वहीं, राहुल गांधी ने कहा:

“ट्रंप का 50% टैरिफ एक आर्थिक ब्लैकमेल है। यह भारत को अनुचित व्यापार समझौते के लिए डराने की कोशिश है। प्रधानमंत्री को देश के हितों से समझौता नहीं करना चाहिए।”


अमेरिका में भारत के समर्थन में उठी आवाज़ें

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निकी हेली ने ट्रंप के फैसले की आलोचना करते हुए कहा:

“भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए, लेकिन चीन को 90 दिन की छूट देना और भारत जैसे सहयोगी पर कठोर रुख अपनाना गलत है।”

गायिका मैरी मिलबेन, जिन्होंने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रगान गाया था, उन्होंने भी एक्स पर लिखा:

“असली दोस्त बातचीत करते हैं, झगड़ते नहीं। अमेरिका और भारत को एक-दूसरे की जरूरत है।”


रूस का भारत के पक्ष में बयान

मंगलवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा:

“हर संप्रभु देश को अपने आर्थिक हितों के अनुसार ट्रेड पार्टनर चुनने का अधिकार है।”

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाख़ारोवा ने कहा:

“अमेरिका जो देश उसकी राह पर नहीं चलते, उनके खिलाफ राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित आर्थिक दबाव बनाता है।”


ट्रंप का दावा: ‘मैंने भारत-पाक युद्ध रोका’

एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने “भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोका था।” यह बयान उन्होंने पहले भी 30 बार से ज़्यादा बार दोहराया है। हालांकि भारत का दावा है कि युद्धविराम की सहमति सैन्य अधिकारियों के आपसी संवाद से हुई थी।


आगे क्या?

  • अगर ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं, तो भारत पर दीर्घकालिक टैरिफ नीति लागू हो सकती है।
  • भारत WTO और अन्य वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को उठा सकता है।
  • भारत को अब नई ट्रेड रणनीति बनानी होगी, जिसमें यूरोप, दक्षिण एशिया और अफ्रीका के बाज़ारों पर फोकस हो।

डोनाल्ड ट्रंप का यह निर्णय वैश्विक राजनीति और व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है। जहां एक ओर अमेरिका घरेलू हितों के नाम पर टैरिफ बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत को अपनी विदेश नीति, व्यापार नीति और रणनीतिक साझेदारियों को और मज़बूती देने की जरूरत है।

इस समय भारत को न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूती से रखना भी अनिवार्य है।

image source – BBC NEWS

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