ऑपरेशन सिंदूर: राजनाथ सिंह का संसद में बड़ा बयान – “विमान नहीं, नतीजे मायने रखते हैं”
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। बहस की शुरुआत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए स्पष्ट किया कि भारत की सैन्य कार्रवाई पूरी तरह सफल रही और इसके जरिए वांछित राजनीतिक और सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लिया गया।
विपक्ष के सवालों पर तीखा जवाब
राजनाथ सिंह ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा, “आप यह पूछते हैं कि हमारे कितने विमान गिरे, लेकिन यह नहीं पूछते कि दुश्मन के कितने विमान गिरे। परीक्षा में यह मायने नहीं रखता कि पेंसिल टूट गई या पेन खो गया, असली मायने रिजल्ट का होता है।”
उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि सरकार और सेना की प्राथमिकता नतीजों पर है, न कि खोखली बयानबाज़ी पर। रक्षा मंत्री के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर को केवल इसलिए “रोक” दिया गया है क्योंकि तय किए गए लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिए गए हैं — ना कि किसी बाहरी दबाव की वजह से।
ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति और परिणाम
रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में मौजूद कुल 9 आतंकी शिविरों को निशाना बनाया। इनमें से 7 ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया, जबकि अन्य दो को भी भारी क्षति पहुंची।
उन्होंने आगे बताया कि इस पूरे सैन्य अभियान में अत्याधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति का इस्तेमाल किया गया। केवल 22 मिनट में यह ऑपरेशन पूरा कर लिया गया। यह एक “नॉन-एस्केलेटरी स्ट्राइक” थी, यानी इसका उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि दुश्मन को साफ संदेश देना था।
कोई भारतीय जवान नहीं हुआ हताहत
यह भी गौर करने वाली बात रही कि इस ऑपरेशन में एक भी भारतीय जवान को चोट तक नहीं आई। रक्षा मंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि ऑपरेशन को अंजाम देने से पहले सेना ने हर एंगल से रणनीति बनाई थी। लक्ष्य था – आतंकियों को अधिकतम नुकसान पहुंचाना और आम नागरिकों को कोई क्षति न हो।
पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर फिर कोई नापाक हरकत की गई तो भारत चुप नहीं बैठेगा। अब जवाब उसी भाषा में दिया जाएगा, जैसी भाषा बालाकोट स्ट्राइक में दी गई थी।”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यह भलीभांति जानता है कि वह सीधी लड़ाई में भारतीय सेना से जीत नहीं सकता, इसलिए वह आतंकवाद जैसे हथकंडों का सहारा लेता है।
भारत की नीति – पहले दोस्ती, अब सर्जिकल जवाब
रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने हमेशा पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती की नीति अपनाई है। लेकिन जब बार-बार दोस्ती का हाथ ठुकराया जाता है, तो जवाब भी उसी तरीके से दिया जाता है। अब भारत आतंक का जवाब आतंक के ठिकानों पर सटीक हमला कर देता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ केवल निंदा नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की नीति पर काम कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर जैसी योजनाएं सिर्फ सैन्य सफलता ही नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक छवि को भी मज़बूत बनाती हैं। आने वाले समय में भारत की नीति स्पष्ट है — अगर कोई देश आतंक को समर्थन देगा, तो उसे कड़ा और सटीक जवाब दिया जाएगा।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा। चाहे वह सीमा पार हो या पीओके के आतंकी ठिकाने — अब हर कार्रवाई का जवाब ठोस और निर्णायक होगा।
विपक्ष की आलोचना और सवालों के बीच राजनाथ सिंह का बयान न केवल सेना का मनोबल बढ़ाता है, बल्कि पूरे देश को यह भरोसा भी दिलाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने में सक्षम है।

लोकसभा में बोले – “परीक्षा में पेन नहीं, रिजल्ट मायने रखता है”
