लाडली बहन योजना विवाद: पुरुष लाभार्थियों पर सरकार की पुष्टि, महाराष्ट्र में मचा हड़कंप
महाराष्ट्र में लाडली बहन योजना विवाद (या ‘लाडकी बहीण योजना’) एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस योजना को 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू किया गया था और इसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली महायुति सरकार की चुनावी सफलता की एक बड़ी वजह माना गया। हालांकि अब यह योजना प्रशासनिक अनियमितताओं और गलत लाभार्थियों की वजह से सुर्खियों में है।
पुरुषों को भी मिला योजना का लाभ
राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अदिति तटकरे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने स्वीकार किया है कि कुछ पुरुषों ने भी इस योजना का लाभ उठाया और उनके खातों में सरकारी सहायता की राशि जमा की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 14,298 पुरुषों को योजना के तहत लाभ मिला है। यह योजना विशेष रूप से महिलाओं के लिए शुरू की गई थी, जिससे 21 से 65 वर्ष की आयु की कम आय वाली महिलाओं को ₹1,500 मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
सरकार का बयान और जांच प्रक्रिया
अदिति तटकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि कुछ लाभार्थी एक से अधिक योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, कुछ परिवारों में दो से अधिक सदस्य लाभार्थी हैं और कई स्थानों पर पुरुषों ने भी आवेदन कर योजना का लाभ उठाया है।
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मीडिया से कहा, “यह योजना ग़रीब बहनों की मदद के लिए शुरू की गई थी। अगर किसी ने इसका ग़लत फायदा उठाया है, तो हम उनसे यह पैसा वापस लेंगे।”

अब तक की कार्रवाई
सरकारी जांच में अब तक 26.34 लाख लाभार्थियों को ‘अयोग्य’ पाया गया है। इनमें से कई लोग एक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे थे, कुछ उच्च आय वर्ग से ताल्लुक रखते थे, और कुछ पुरुषों ने खुद को महिला बताकर योजना में पंजीकरण कराया। अदिति तटकरे के अनुसार, इन सभी लाभार्थियों की राशि जून 2025 से अस्थायी रूप से रोक दी गई है।
विपक्ष की मांग: हो विशेष जांच
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने लाडली बहन योजना विवाद की विशेष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “जब इतनी बड़ी सरकारी तकनीक और डेटा है, तो कैसे पुरुषों को महिलाओं की योजना में शामिल किया गया? इसके पीछे कोई साज़िश हो सकती है और इसकी जांच SIT या CBI से होनी चाहिए।”

प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
पूर्व आईएएस अधिकारी महेश झगडे ने इस मामले में प्रशासन को दोषी ठहराते हुए कहा कि योजना के मानदंड तय करने और उनका पालन कराने की जिम्मेदारी सरकारी मशीनरी की है। उन्होंने सवाल उठाया, “जब कोई पुरुष आवेदन करता है, तो यह स्पष्ट नहीं होता कि वह महिला नहीं है? इसका मतलब है कि जांच में गंभीर लापरवाही हुई है।”
क्या होगा अब?
सरकार ने फिलहाल यह तय नहीं किया है कि इन ‘अवैध’ लाभार्थियों से राशि कैसे वसूली जाएगी। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। हालांकि, मार्च 2025 में एक साक्षात्कार के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था, “यह सरकार देने वाली है, लेने वाली नहीं।”
अर्थशास्त्रियों की राय
अर्थशास्त्री नीरज हाटेकर का कहना है कि यह योजना चुनाव जीतने का माध्यम थी और इसकी सही जांच-पड़ताल नहीं की गई। उनका मानना है कि लाभार्थियों से राशि वसूलना व्यावहारिक नहीं है क्योंकि अधिकांश ने पैसे खर्च कर दिए होंगे।
सरकार का रुख
महाराष्ट्र भाजपा के मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने कहा कि यह योजना महिला सशक्तिकरण के लिए बनाई गई थी और इसमें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक चूक को सरकार दूर करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह योजना कोई चुनावी स्टंट नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिबद्धता है।
निष्कर्ष
लाडली बहन योजना विवाद यह दर्शाता है कि किसी भी सामाजिक कल्याण योजना को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करना आवश्यक है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का यह एक सराहनीय प्रयास था, लेकिन इसके कार्यान्वयन में आईं खामियां सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे से कैसे निपटती है और आगे पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित करती है।
Image source -BBC News

