राजनीति

“मेरी मां के आंसुओं की चर्चा हुई, पहलगाम की नहीं: प्रियंका का संसद में भावुक बयान”

लोकसभा में गरमाई बहस, प्रियंका गांधी का तीखा प्रहार

प्रियंका गांधी पहलगाम हमला मामले में लोकसभा के अंदर सरकार पर जमकर बरसीं। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत पर उन्होंने मोदी सरकार से जवाब मांगा। लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा चूक पर सवाल उठाए और मोदी सरकार की चुप्पी पर तीखी आलोचना की।

प्रियंका ने कहा, “रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भाषण लंबा था लेकिन उसमें एक जरूरी बात छूट गई—बैसरन वैली जैसे संवेदनशील पर्यटक स्थल पर कोई सुरक्षा क्यों नहीं थी?” “प्रियंका गांधी पहलगाम हमला मामले में सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही थीं।”


प्रियंका गांधी पहलगाम हमला: संसद में तीखे सवाल

प्रियंका गांधी ने हमले में मारे गए 26 नागरिकों, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय युवक शामिल थे, के लिए सदन में संवेदना व्यक्त की। उन्होंने खासतौर पर शुभम द्विवेदी का ज़िक्र किया, जिनकी छह महीने पहले ही शादी हुई थी और वे अपनी पत्नी के साथ कश्मीर घूमने गए थे। दुर्भाग्यवश, आतंकी हमले में शुभम को उनकी पत्नी के सामने ही मार दिया गया।

उन्होंने पूछा:

  • क्या सरकार को पता नहीं था कि बैसरन घाटी में रोज़ाना 1000-1500 पर्यटक जाते हैं?
  • क्या सुरक्षा एजेंसियों को यह मालूम नहीं था कि वहां जंगल के रास्तों से होकर जाना पड़ता है?
  • वहां एक भी सैनिक क्यों नहीं था?
  • प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) की कोई सुविधा क्यों नहीं थी?

“सरकार के भरोसे गए थे, भगवान भरोसे छोड़ दिए गए”

प्रियंका गांधी ने कहा, “इन लोगों ने सरकार पर भरोसा करके वहां जाना चुना, लेकिन सरकार ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया। वहां कोई सुरक्षा नहीं थी, कोई चिकित्सा सुविधा नहीं थी। अगर सरकार ये दावा करती है कि कश्मीर में अमन और चैन है, तो फिर ऐसी भयावह घटना कैसे हुई?”


“मेरी मां के आंसुओं की बात हुई, लेकिन पहलगाम की बात नहीं”

प्रियंका गांधी ने अमित शाह द्वारा सोनिया गांधी पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मेरी मां के आंसू तब गिरे थे जब मेरे पिता की आतंकवादियों ने हत्या की थी। वो सिर्फ 44 साल की थीं। आज अगर मैं इस सदन में खड़ी हूं और उन 26 लोगों की बात कर रही हूं, तो इसलिए कि मैं उनका दर्द जानती हूं, महसूस करती हूं।”

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह बीते इतिहास की बातें तो करती है, लेकिन वर्तमान की जवाबदेही से बचती है।


ऑपरेशन सिंदूर और मोदी सरकार की प्रतिक्रिया

लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। उन्होंने कहा:

“अगर पाकिस्तान फिर कोई हरकत करेगा तो हम और भी कठोर जवाब देंगे। ये संघर्ष सभ्यता बनाम बर्बरता का है। हमारी मूल प्रकृति बुद्ध की है, युद्ध की नहीं, लेकिन जवाब देना आता है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह ऑपरेशन पाकिस्तान को यह दिखाने के लिए था कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करता


विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा खुलासा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऑपरेशन से जुड़ी कूटनीतिक गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि:

  • 9 मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर पाकिस्तान द्वारा संभावित बड़े हमले की जानकारी दी थी।
  • 25 अप्रैल से ऑपरेशन शुरू होने तक पीएम मोदी और मेरे स्तर पर कुल 47 कॉल हुईं।
  • प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमला हुआ तो भारत माकूल जवाब देगा।

उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई, जैसा कि कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था।


विपक्ष के सवाल: “सीज़फायर क्यों और कैसे?”

चर्चा में विपक्ष के कई सांसदों ने हिस्सा लिया और सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए:

गौरव गोगोई (कांग्रेस सांसद):

“हम सरकार के दुश्मन नहीं हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं, लेकिन सच्चाई सामने आनी चाहिए। अगर पाकिस्तान झुकने को तैयार था तो 21 में से सिर्फ 9 टार्गेट क्यों चुने गए?”

असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM सांसद):

“इस पहलगाम हमले को लेकर प्रियंका गांधी ने संसद में तीखा हमला बोला।”

“जब बैसरन की वादियों में निर्दोष मारे गए, तब आप पाकिस्तान से खेल क्यूं खेलना चाहते हैं? क्या आपका ज़मीर जिंदा है?”


सवाल अभी बाकी हैं…

प्रियंका गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तीखी हो गई है। सरकार का दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य और कूटनीतिक ताकत का उदाहरण है, लेकिन विपक्ष यह पूछ रहा है कि अगर इतने बड़े हमले की पूर्व सूचना थी, तो बैसरन घाटी जैसे संवेदनशील स्थान पर कोई तैयारी क्यों नहीं थी?


🔎 निष्कर्ष (Conclusion)

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भले ही भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया हो, लेकिन पहलगाम हमले में मारे गए 26 नागरिकों की मौत पर जो सवाल उठ रहे हैं, वे जवाब मांगते हैं। प्रियंका गांधी का भाषण इस बात की ओर इशारा करता है कि केवल सैन्य कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, आंतरिक सुरक्षा और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

Image Source- Sansad tv

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *