संसद से पाकिस्तान को कड़ा संदेश: पीएम मोदी बोले – खून और पानी साथ नहीं बह सकते, सिंधु जल संधि पर बड़ा फैसला0
सिंधु जल संधि पर पीएम मोदी का संसद में बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इसे भारत की ऐतिहासिक गलती करार दिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मानसून सत्र 2025 में पाकिस्तान और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब भारत ने वह ऐतिहासिक गलती सुधार ली है जो आज़ादी के बाद की गई थी। उन्होंने घोषणा की कि भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित (Suspend) कर दिया है और अब “खून और पानी साथ-साथ नहीं बहेंगे”।
सिंधु जल समझौते पर तीखा प्रहार
पीएम मोदी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों को आड़े हाथों लिया और कहा कि देश के हितों के साथ सबसे बड़ी सौदेबाज़ी नेहरू सरकार ने सिंधु जल संधि के माध्यम से की थी। उन्होंने कहा कि यह संधि भारत के 80% जल संसाधनों को पाकिस्तान को सौंपने के लिए तैयार हुई थी, जो देश की सुरक्षा और कृषि हितों के खिलाफ था।
“ये नदियां भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं, और नेहरू जी ने हमारे किसानों और नागरिकों के अधिकार को गिरवी रख दिया था,” – पीएम मोदी ने संसद में कहा।
‘लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई’
प्रधानमंत्री ने तीखे लहजे में कहा, “जब भी मैं नेहरू जी की गलतियों की बात करता हूं तो कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम बिलबिला उठता है। लेकिन सच यह है कि आजादी के बाद लिए गए कई फैसले आज देश को भुगतने पड़ रहे हैं। जैसा कि शेर है – ‘लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई।’”
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह भारत को अपने ही बांधों की डिसिल्टिंग (कीचड़ हटाने) की अनुमति भी पाकिस्तान की सहमति से लेनी पड़ती थी। एक बांध के डिसिल्टिंग गेट तक को वेल्ड कर दिया गया क्योंकि भारत को पाकिस्तान की बिना मंजूरी के उसकी सफाई की इजाजत नहीं थी।
नेहरू सरकार ने किसानों के हक छीने – पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु जल संधि के कारण कई परियोजनाएं थम गईं और किसानों को सीधा नुकसान हुआ। भारत ने खुद अपने ही पानी का नियंत्रण खो दिया। उन्होंने यह भी बताया कि नेहरू ने पाकिस्तान को नहरें बनाने के लिए करोड़ों रुपये दिए, जो आज समझ से परे है।
1971 और 1965 की गलतियां भी गिनाईं
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कांग्रेस की ऐतिहासिक भूलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि 1965 की जंग में हमारी सेना ने हाजीपीर पास को अपने कब्जे में लिया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने उसे फिर से पाकिस्तान को लौटा दिया। 1971 में जब पाकिस्तान के 93 हजार सैनिक भारत की हिरासत में थे, तब भी पीओके को भारत में मिलाने का निर्णय नहीं लिया गया।
“इतना कुछ हमारे पास था, लेकिन दूरदृष्टि की कमी और निर्णय लेने की हिम्मत न होने के कारण देश को वह सब नहीं मिला, जिसका हकदार था,” – पीएम मोदी ने कहा।
कच्चातिवु द्वीप, करतारपुर साहिब और अन्य भूलें
पीएम मोदी ने यह भी याद दिलाया कि 1974 में भारत ने श्रीलंका को कच्चातिवु द्वीप उपहार में दे दिया था, जिससे आज भी भारतीय मछुआरों को खतरे का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब जैसे धार्मिक स्थल को भारत में शामिल करने का अवसर भी गंवा दिया गया।
कूटनीति और राष्ट्रहित पर मोदी का साफ संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब बात देश के हितों की आती है तो सरकार को कठोर और दूरदर्शी निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कांग्रेस को 26/11 के बाद पाकिस्तान के साथ बातचीत करने और मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा न हटाने के लिए भी आड़े हाथों लिया।
🔍 निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट था – अब भारत की नीति आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की है। सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय पाकिस्तान को एक स्पष्ट चेतावनी है कि अब भारत अपने हितों की अनदेखी नहीं करेगा।
Image source- sansad tv

