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“अमेरिका का ईरान पर प्रतिबंध: छह भारतीय कंपनियों पर लगी रोक, ईरान ने जताई आपत्ति

अमेरिका ने ईरान से व्यापार के कारण 6 भारतीय कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध

अमेरिका का ईरान पर प्रतिबंध अब भारत पर भी दिख रहा है। छह भारतीय कंपनियों पर सख्त कार्रवाई हुई है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय कंपनियों पर भी दिखने लगा है। अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े व्यापारिक नेटवर्क को निशाना बनाते हुए छह भारतीय कंपनियों समेत कुल 20 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर नए आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है।

अमेरिका का आरोप: ईरान की कमाई से बढ़ता है आतंकवाद

अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट कहा है कि, “ईरान का शासन मध्य पूर्व में हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा देता है। वह तेल और पेट्रोकेमिकल बिक्री से मिलने वाली राशि का उपयोग विदेशी आतंकवादी संगठनों को सहायता देने और अपने ही नागरिकों पर दमन करने के लिए करता है।” इसी आधार पर अमेरिका ने ईरान से जुड़ी कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया है।

अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी कि जो भी देश या व्यक्ति ईरान से तेल या पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद करेगा, वह अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आ सकता है और अमेरिका के साथ कारोबार करने का अधिकार खो सकता है।


प्रतिबंधित भारतीय कंपनियां कौन-कौन सी हैं?

1. अलकेमिकल सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड

जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 के बीच कंपनी ने ईरान से 84 मिलियन डॉलर मूल्य के पेट्रोकेमिकल उत्पाद आयात किए।

2. ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड

इस कंपनी ने जुलाई 2024 से जनवरी 2025 के बीच ईरान से 51 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के उत्पाद आयात किए।

3. ज्यूपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड

मुंबई की यह कंपनी ईरान से टोल्यून और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद आयात कर रही थी, जिसकी कुल कीमत लगभग 49 मिलियन डॉलर रही।

4. रमणिकलाल एस. गोसालिया एंड कंपनी

इस कंपनी ने जनवरी 2024 से जनवरी 2025 तक लगभग 22 मिलियन डॉलर के पेट्रोकेमिकल्स (मेथनॉल और टोल्यून) मंगवाए।

5. पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड

इस कंपनी ने अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच 14 मिलियन डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदे।

6. कंचन पॉलिमर्स

इस कंपनी ने ईरान की तानाइस ट्रेडिंग से पॉलीएथिलीन जैसे उत्पाद खरीदे जिनकी कीमत लगभग 1.3 मिलियन डॉलर रही।


प्रतिबंधों का असर क्या होगा?

अमेरिकी कानूनों के तहत, इन प्रतिबंधित कंपनियों और व्यक्तियों की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियों को ब्लॉक कर दिया जाएगा। अमेरिकी नागरिकों और संस्थाओं को इनसे किसी भी प्रकार का लेन-देन करने की अनुमति नहीं होगी।

इन प्रतिबंधों का उद्देश्य इन कंपनियों को दंडित करना नहीं बल्कि उनके व्यापार व्यवहार में बदलाव लाना है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के “ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट कंट्रोल (OFAC)” को इन प्रतिबंधों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।


ईरान ने दी तीखी प्रतिक्रिया

ईरान ने अमेरिका के इस कदम को ‘आर्थिक साम्राज्यवाद’ करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। भारत में ईरान के दूतावास और ईरानी विदेश मंत्रालय दोनों ने इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “अमेरिका का यह निर्णय दुर्भावनापूर्ण और मानवाधिकारों के बुनियादी सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह ईरान की आर्थिक प्रगति को बाधित करने की एक साज़िश है।”


निष्कर्ष

“अमेरिका का ईरान पर प्रतिबंध” अब सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है और भारतीय कंपनियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। आने वाले समय में भारत सरकार और प्रभावित कंपनियों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

image source- BBC NEWS

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