“मैं शिवसेना का पिता हूं”: BJP नेता के बयान पर मचा बवाल, शिंदे गुट ने दी चेतावनी
शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के नाम को लेकर बयानबाज़ी, सियासी तकरार बढ़ी
मुंबई, 5 अगस्त 2025 –परिणय फुके शिवसेना विवाद में बड़ा बयान सामने आया है, जब महाराष्ट्र बीजेपी नेता परिणय फुके ने कहा, “मैं शिवसेना का पिता हूं महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी के बवंडर में घिर गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) परिणय फुके द्वारा खुद को “शिवसेना का पिता” कहने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान को शिवसेना (शिंदे गुट) ने न केवल आपत्तिजनक बताया है बल्कि इसे शिवसेना की विचारधारा और संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का अपमान माना है। पार्टी ने 12 घंटे के भीतर माफी की मांग की है, अन्यथा “शिवसेना स्टाइल” में जवाब देने की चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला?
BJP एमएलसी परिणय फुके ने 4 अगस्त को भंडारा जिले में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए एक बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा:
“अब मुझे पता है कि मैं भंडारा में शिवसेना का पिता हूं।”
उनके इस बयान के तुरंत बाद ही शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने इसे बेहद आपत्तिजनक और असंवेदनशील करार दिया। खासतौर पर जब वह पार्टी, शिवसेना, जिसे बाला साहेब ठाकरे की विरासत माना जाता है, उसी का “पिता” बताने की बात कही गई हो।
शिंदे गुट का तीखा पलटवार
शिवसेना (शिंदे गुट) के लोकसभा प्रभारी संजय कुंभलकर ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
“परिणय फुके को 12 घंटे के अंदर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी, वरना हम शिवसेना शैली में जवाब देंगे।”
कुंभलकर ने साफ कहा कि शिवसेना की स्थापना बालासाहेब ठाकरे ने की थी और वही एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्हें “शिवसेना का पिता” कहा जा सकता है। उन्होंने फुके के बयान को न केवल अनुचित बल्कि पार्टी के इतिहास और भावनात्मक विरासत का अपमान बताया।
BJP नेता ने दी सफाई
मामला बढ़ता देख BJP एमएलसी परिणय फुके ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने दावा किया कि उनके बयान का मक़सद किसी को नीचा दिखाना नहीं था। फुके ने कहा:
“जब बेटा अच्छा करता है तो मां को श्रेय मिलता है, और गलती पर बाप को दोष मिलता है। उसी भावना से मैंने कहा कि मैं भंडारा में शिवसेना का पिता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह टिप्पणी स्थानीय राजनीति और अपने राजनीतिक योगदान को लेकर व्यंग्यात्मक ढंग से दी गई थी।
राजनीतिक साझेदारी में खिंचाव?
गौरतलब है कि शिवसेना (शिंदे गुट) और BJP महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार चला रहे हैं। लेकिन इस तरह की बयानबाज़ी से यह सवाल उठने लगा है कि क्या दोनों दलों के बीच भीतरी मतभेद गहरे हो रहे हैं? यह पहला मौका नहीं है जब दोनों पक्षों के नेताओं के बीच जुबानी जंग देखी गई हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी समीकरणों और क्षेत्रीय दबावों के बीच ऐसी बयानबाज़ी, गठबंधन की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर तब जब दोनों दल अलग-अलग विचारधारा से निकलकर साथ आए हों।
शिवसेना के लिए भावनात्मक मुद्दा
बालासाहेब ठाकरे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि शिवसेना के लिए एक विचार और भावनात्मक शक्ति रहे हैं। ऐसे में किसी और व्यक्ति द्वारा खुद को “शिवसेना का पिता” बताना, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए असहनीय बन जाता है।
संजय कुंभलकर ने यह भी जोड़ा कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत का राजनीतिक इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर BJP गठबंधन में बनी रहना चाहती है, तो अपने नेताओं को मर्यादा में रहना होगा।
आगे क्या?
अब देखने वाली बात यह होगी कि परिणय फुके सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हैं या नहीं। साथ ही, शिंदे गुट अपनी चेतावनी पर कितना अमल करता है। इस बयान के बाद BJP नेतृत्व पर भी दबाव है कि वह अपने नेता की टिप्पणी पर रुख साफ करे।

