राजनीति

महादेवपुरा ‘वोट चोरी’ विवाद: राहुल गांधी के आरोपों पर क्या कह रहे हैं स्थानीय लोग?

महादेवपुरा वोट चोरी विवाद कर्नाटक की राजनीति में नया तूफान लेकर आया है, जहां राहुल गांधी और बीजेपी एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

बीते कुछ दिनों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र की महादेवपुरा विधानसभा सीट को लेकर कथित “वोट चोरी” विवाद तेज़ हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए चुनावी धांधली के आरोप लगाए, वहीं बीजेपी ने इन्हें बेबुनियाद बताया। सवाल यह है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी की ज़िम्मेदारी आखिर किसकी है – मतदाताओं की, चुनाव आयोग की या राजनीतिक दलों की?


राहुल गांधी का आरोप और महादेवपुरा का उदाहरण

राहुल गांधी ने लोकसभा में बेंगलुरु सेंट्रल सीट का मामला रखते हुए विशेष रूप से महादेवपुरा का उदाहरण दिया। कांग्रेस का दावा है कि इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हैं।
पहला मामला मुनि रेड्डी गार्डन के मकान संख्या 35 से जुड़ा है, जहां मतदाता सूची में 80 लोगों के नाम दर्ज हैं।

जब पत्रकारों ने इस पते का दौरा किया तो यहां कई छोटे-छोटे एक कमरे वाले मकान मिले, जिनका आकार लगभग 8×8 फीट था। हर कमरे में एक छोटी सी रसोई और पास में बाथरूम था। आसपास के ज्यादातर मकान इसी आकार के हैं और इनमें मुख्य रूप से देश के अलग-अलग राज्यों से आए प्रवासी मज़दूर रहते हैं।


प्रवासी मज़दूरों की स्थिति

मकान मालिक के भाई गोपाल रेड्डी बताते हैं कि ये मकान “लेबर क्लास शेड” कहलाते हैं। यहां रहने वाले मज़दूर हर 3-6 महीने में स्थान बदलते रहते हैं। नौकरी के लिए इन्हें रेंटल एग्रीमेंट दिखाना पड़ता है, जिससे इन्हें वोटर आईडी भी मिल जाती है। जब इनकी आय बढ़ जाती है, तो ये लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो जाते हैं।

गोपाल रेड्डी का कहना है,

“राहुल गांधी एक राष्ट्रीय नेता हैं। उन्हें गुमराह करके यह मुद्दा खड़ा किया जा रहा है।”


स्थानीय लोगों की राय

पश्चिम बंगाल से आए दीपांकर सरकार यहां एक महीने पहले शिफ्ट हुए हैं और फूड डिलीवरी एजेंट का काम करते हैं। उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता वह यहां कितने समय रहेंगे।
एक अन्य निवासी, जो 12 साल से बेंगलुरु में काम कर रहे हैं, बताते हैं कि वह यहां वोट नहीं देते और चुनाव के समय अपने राज्य वापस जाते हैं।


दूसरा उदाहरण: माइक्रोब्रूअरी

कथित “वोट चोरी” का दूसरा उदाहरण एक माइक्रोब्रूअरी से जुड़ा है, जिसके पते पर 68 मतदाता पंजीकृत हैं। फैक्ट्री के एक कर्मचारी के अनुसार, यहां प्रवासी मज़दूर कम समय के लिए काम करते हैं और मालिकाना हक़ हाल ही में बदला है।


कांग्रेस की मांग

2024 लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से कांग्रेस प्रत्याशी रहे मंसूर अली खान का कहना है कि ये मामले गंभीर हैं।
उनके मुताबिक,

“एक कमरे में 80 वोट कैसे दर्ज हो सकते हैं? व्यावसायिक संस्थान के पते पर मतदाता पंजीकरण कैसे संभव है? बूथ लेवल अधिकारी क्या कर रहे हैं?”

मंसूर अली खान 32,707 वोटों से हार गए थे, जबकि यहां बीजेपी के पीसी मोहन लगातार 2009 से जीतते आ रहे हैं।


महादेवपुरा का सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य

महादेवपुरा और व्हाइटफ़ील्ड क्षेत्र आईटी सेक्टर के बड़े केंद्र हैं, जिससे यहां उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। पढ़े-लिखे पेशेवरों के साथ-साथ छोटे-मोटे काम करने वाले लोग भी यहां बसे हुए हैं। बीजेपी के मुताबिक, यह सीट उनके लिए अहम है और यहां अरविंद लिम्बावली का गढ़ माना जाता है।


बीजेपी का जवाब

बीजेपी नेता अरविंद लिम्बावली ने कांग्रेस के आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि कई लोग नौकरी के सिलसिले में जगह बदलते रहते हैं, जिससे उनके वोटर पते में बदलाव होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस उन मामलों को “वोट चोरी” बताकर राजनीति कर रही है, जो सामान्य प्रवासी पैटर्न का हिस्सा हैं।

लिम्बावली ने कहा,

“अगर चामराजपेट और शिवाजीनगर में गलत पते के मामले हैं, तो वहां कांग्रेस क्यों नहीं सवाल उठाती? राहुल गांधी को तथ्यों की जांच करनी चाहिए।”


मतदाताओं की मिली-जुली राय

इस क्षेत्र में मतदाताओं की राय बंटी हुई है।

  • दुकानदार कृष्णा का कहना है कि राहुल गांधी का आरोप गलत है और उन्हें लिम्बावली पर भरोसा है।
  • वरिष्ठ नागरिक मुनि रेड्डी के मुताबिक, यह सब राजनीति है और अधिकारियों को बेवजह दोषी ठहराया जा रहा है।
  • वहीं, निवासी शशिकला मानती हैं कि यहां रहने वाले लोग स्थानीय और अपने राज्य दोनों जगह वोट देते हैं।
  • एक स्थानीय स्टोर मैनेजर दर्शन का मानना है कि फर्जी वोटरों को सूची से हटाना ज़रूरी है।

कांग्रेस के तीन बड़े सवाल

मंसूर अली खान का कहना है कि इस मामले में कांग्रेस चुनाव आयोग से तीन सवाल पूछ रही है:

  1. चुनाव आयोग इस मुद्दे पर चुप क्यों है?
  2. जब कांग्रेस सवाल उठाती है, तो बीजेपी उसका बचाव क्यों करती है?
  3. क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम कर रहा है या पक्षपात कर रहा है?

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

भले ही राजनीतिक बयानबाज़ी अलग-अलग हो, लेकिन यह मामला चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाता है। मतदाता सूची का सत्यापन, फर्जी नाम हटाना और नए पंजीकरण की जांच आयोग की ज़िम्मेदारी है। डिजिटल युग में भी मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ी होना गंभीर चिंता का विषय है।


निष्कर्ष

महादेवपुरा का यह विवाद दिखाता है कि प्रवासी जनसंख्या, चुनावी पंजीकरण और राजनीतिक हितों का मेल किस तरह एक जटिल मुद्दा बन सकता है। राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोप हों या बीजेपी का बचाव – असली चुनौती यह है कि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष कैसे बनाया जाए। चुनाव आयोग को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाकर मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करनी होगी, तभी “वोट चोरी” जैसी बहसों का अंत हो सकता है।

image source – BBC NEWS

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