राजनीति

कर्नाटक के एमएलसी एस.एल. भोजेगौड़ा का विवादित बयान – “मेरे कार्यकाल में 2800 कुत्तों को मरवाया”

विधान परिषद में गरमा गया मुद्दा

कर्नाटक विधान परिषद में बुधवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब जनता दल (सेक्युलर) के नेता और एमएलसी एस.एल. भोजेगौड़ा ने खुद यह दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब 2800 आवारा कुत्तों को मरवाया
यह बयान सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के संदर्भ में आया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन

भोजेगौड़ा ने विधान परिषद में बोलते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरी तरह समर्थन करते हैं। उनका कहना था कि जिन बच्चों को आवारा कुत्तों ने काटा है, सिर्फ वही लोग उस दर्द को समझ सकते हैं।
उन्होंने साफ कहा —

“जब मैं चिक्कमगलुरु नगर परिषद का अध्यक्ष था, तब मेरी देखरेख में 2800 कुत्तों को मरवाया गया था। अगर यह अपराध है, तो मैं इसके लिए जेल जाने को भी तैयार हूं।”

सुप्रीम कोर्ट का ताजा निर्देश

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और ग़ाज़ियाबाद जैसे इलाकों में सभी आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर में रखने का आदेश दिया है।
इस फैसले का मकसद डॉग बाइट और रेबीज़ के बढ़ते मामलों को रोकना है। कोर्ट ने अधिकारियों को आठ हफ्तों में यह प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा दी है।

कोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  • छोटे बच्चों और शिशुओं को किसी भी हाल में रेबीज़ का शिकार नहीं होना चाहिए।
  • लोगों में यह भरोसा होना चाहिए कि वे बिना डर के सड़क पर चल सकें।
  • इस प्रक्रिया में कोई भी व्यक्ति या संगठन बाधा डालेगा, तो उस पर कानूनी कार्रवाई होगी।
  • हर डॉग शेल्टर में कम से कम 5,000 कुत्तों की क्षमता, नसबंदी, टीकाकरण और CCTV कैमरे होने चाहिए।
  • नसबंदी हो चुके कुत्तों को भी अब सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री का अलग रुख

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि केवल कुत्तों को हटाना शासन नहीं, बल्कि यह क्रूरता है।
सिद्धारमैया का सुझाव था कि नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल ही स्थायी और मानवीय समाधान हैं।

“डर के आधार पर लिए गए फैसले केवल ज्यादा दर्द देंगे, सुरक्षा नहीं।”

भोजेगौड़ा की मांग

भोजेगौड़ा ने कर्नाटक सरकार से मांग की कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के बजाय, उसका पालन करने में देश का पहला राज्य बने। उन्होंने कहा कि आदेश में केवल नसबंदी और टीकाकरण का जिक्र है, लेकिन सड़क से कुत्तों को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है।

कौन हैं एस.एल. भोजेगौड़ा?

  • वर्तमान में कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी)।
  • पूर्व में चिक्कमगलुरु नगर परिषद के अध्यक्ष
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य और वाइस-चेयरमैन।
  • जेडीएस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के करीबी।
  • कॉफी उगाने वाले किसान परिवार से ताल्लुक।
  • उनके बड़े भाई एस.एल. धर्मेगौड़ा भी एमएलसी थे, जिनकी 2020 में रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।

आवारा कुत्तों का बढ़ता विवाद

देश में आवारा कुत्तों का मुद्दा कई वर्षों से विवादित रहा है। एक तरफ पशु प्रेमी और एनजीओ इन कुत्तों के संरक्षण की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर लोग इनसे बढ़ते हमलों को लेकर चिंतित हैं।
कई राज्यों में डॉग बाइट और रेबीज़ के मामलों में तेजी आई है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के साथ।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से:

  • दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्ते शेल्टर में भेजे जाएंगे।
  • आठ हफ्तों में यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • डॉग बाइट हेल्पलाइन एक हफ्ते के अंदर शुरू करनी होगी।
  • विशेष डॉग-कैचिंग बल तैनात होंगे।

विवाद क्यों गहराया?

भोजेगौड़ा के बयान ने सोशल मीडिया और राजनीति दोनों में बहस छेड़ दी है।

  • समर्थक कहते हैं कि उन्होंने जनता की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाया।
  • विरोधी इसे अमानवीय और क्रूर बताते हैं।
  • पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आवारा कुत्तों को मारना कोई समाधान नहीं, बल्कि यह कानून के खिलाफ है।

आगे क्या?

गुरुवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच सुनवाई करेगी। उम्मीद है कि इस दौरान कुत्तों की सुरक्षा, जनता की सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों पर संतुलित फैसला आएगा।


निष्कर्ष

कर्नाटक के एमएलसी एस.एल. भोजेगौड़ा का “2800 कुत्तों को मरवाने” वाला बयान न सिर्फ राजनीतिक बहस का मुद्दा बना, बल्कि इसने मानव सुरक्षा बनाम पशु अधिकार जैसे ज्वलंत सवाल को फिर से केंद्र में ला दिया है। अब नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि आगे देश में आवारा कुत्तों को लेकर नीतियां कैसी होंगी।

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