तेजस्वी यादव ने महागठबंधन में कांग्रेस के बोझ होने के सवाल पर दिया यह जवाब
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: तेजस्वी यादव के एजेंडे, गठबंधन की रणनीति और सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं

प्रस्तावना
बिहार की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड़ पर खड़ी है। राज्य में कुछ महीनों में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 होने वाले हैं और इससे पहले ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी है। मतदाता सूची को लेकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) अभियान चल रहा है, लेकिन इसी बीच विपक्षी दलों ने इसमें अनियमितताओं का आरोप लगाकर मोर्चा खोल दिया है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने “वोट अधिकार यात्रा” की शुरुआत की है। दूसरी ओर, बिहार की सत्तारूढ़ एनडीए सरकार को चुनौती देने के लिए राजद और महागठबंधन पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चित चेहरा हैं तेजस्वी यादव, जो खुद को नीतीश कुमार और बीजेपी गठबंधन के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत के रूप में पेश कर रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस बार बिहार चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा, राजद की रणनीति क्या है और तेजस्वी यादव जनता से क्या वादे कर रहे हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी और पलायन
तेजस्वी यादव ने स्पष्ट कहा है कि बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी, पलायन, गरीबी और महंगाई है। राज्य में न तो पर्याप्त कारखाने हैं और न ही इंडस्ट्री। कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, जूट और शुगर मिलें बंद पड़ी हैं।
लोगों को रोजगार, शिक्षा और चिकित्सा के लिए आज भी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और विदेशों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। ऐसे में तेजस्वी यादव का नारा है –
👉 “पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई और सुनवाई वाली सरकार देंगे।”
उन्होंने दावा किया कि 17 महीने की पिछली सरकार में उन्होंने जो वादे किए, उनमें से अधिकांश पूरे किए। लाखों नौकरियों की बहाली, नियोजित शिक्षकों को स्थायी दर्जा और रोजगार मेलों के जरिए नियुक्तियां इसका उदाहरण हैं।
शराबबंदी पर तेजस्वी का रुख
बिहार की राजनीति में शराबबंदी कानून सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। तेजस्वी यादव का कहना है कि वे नशा मुक्ति के पक्षधर हैं, लेकिन वर्तमान कानून का दुरुपयोग हो रहा है।
उन्होंने कहा –
- पुलिस और माफियाओं की मिलीभगत से शराब की तस्करी जारी है।
- कानून की वजह से दलित, पिछड़े और गरीब तबकों को सबसे ज्यादा जेल जाना पड़ रहा है।
- शराबबंदी की समीक्षा के लिए कई दौर की बैठकों की जरूरत है।
यानी, अगर राजद की सरकार बनी तो शराबबंदी को खत्म करने की बजाय, उसे व्यावहारिक और पारदर्शी तरीके से लागू करने पर जोर होगा।
लॉ एंड ऑर्डर और बीजेपी पर हमला
विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप है कि अगर राजद सत्ता में आई तो जंगलराज लौट आएगा। इस पर तेजस्वी यादव का कहना है –
- वे जब डिप्टी सीएम थे, तब कानून-व्यवस्था बिगड़ी नहीं।
- आज की एनडीए सरकार में अपराध लगातार बढ़ा है।
- पटना जैसे सुरक्षित इलाके में भी उनके घर के बाहर गोलीबारी हो चुकी है और अपराधी पकड़े नहीं गए।
उन्होंने कहा कि निवेश लाने के लिए दो चीजें जरूरी हैं –
- बिजली (एनर्जी)
- कानून-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर)
तेजस्वी का दावा है कि उनकी सरकार कभी भी लॉ एंड ऑर्डर से समझौता नहीं करेगी।

जातिगत राजनीति पर राजद का जवाब
बीजेपी और जदयू लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि राजद केवल मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर चलने वाली पार्टी है। इस पर तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए कहा –
- राजद को सभी जातियों और वर्गों ने वोट दिया है।
- पिछली बार उनकी पार्टी सरकार बनाने से सिर्फ कुछ हजार वोटों से चूक गई थी।
- यह कहना कि राजद केवल मुसलमानों और यादवों की पार्टी है, एक प्रोपेगंडा है।
तेजस्वी ने यह भी कहा कि –
👉 “राजद अब लाठी के साथ-साथ लैपटॉप की भी पार्टी है। हमारा ध्यान AI, टेक्नोलॉजी और मॉडर्न एजुकेशन पर है।”
परिवारवाद का आरोप और जवाब
राजद पर हमेशा से परिवारवाद का आरोप लगता रहा है। लेकिन तेजस्वी यादव ने इसे पलटकर एनडीए पर ही ठीकरा फोड़ा।
उन्होंने कहा –
- नीतीश कुमार के कैबिनेट में आधे मंत्री परिवारवाद से जुड़े हुए हैं।
- चिराग पासवान, सम्राट चौधरी, नितिन नवीन जैसे नाम इसका उदाहरण हैं।
- ऐसे में केवल राजद पर परिवारवाद का आरोप लगाना गलत है।
प्रशांत किशोर बनाम तेजस्वी यादव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर (PK) भी एक नया फैक्टर हैं। वे “जन सुराज” अभियान के जरिए गांव-गांव घूम रहे हैं।
लेकिन तेजस्वी यादव ने उन्हें गंभीर चुनौती मानने से इनकार किया।
- उन्होंने कहा कि वे 2012 से गांव-गांव घूम रहे हैं, जबकि PK राजनीति में नए हैं।
- लालू प्रसाद यादव की विचारधारा और जनसंपर्क से उनकी तुलना नहीं की जा सकती।
- पढ़ाई पर सवाल उठाने पर तेजस्वी ने कहा – “शिक्षा और ज्ञान अलग चीज है। कामराज, अंबानी, तेंदुलकर, धोनी कितने पढ़े-लिखे थे? असली बात है काम करना।”
कांग्रेस के साथ गठबंधन और सीट बंटवारा
तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि महागठबंधन का हिस्सा कांग्रेस बनी रहेगी।
- उन्होंने कहा कि 2020 की गलती से सबक लिया गया है।
- इस बार राजद और सहयोगी दल मिलकर मजबूत रणनीति बनाएंगे।
- कांग्रेस “बोझ” नहीं है बल्कि पुराना साथी है।
वर्तमान में महागठबंधन में छह पार्टियां हैं और सीटों के बंटवारे पर बातचीत चल रही है।
AIMIM और ओवैसी का सवाल
सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM अक्सर विपक्षी वोट बैंक को काटने का काम करती है। लेकिन तेजस्वी यादव ने कहा कि –
- राजद से AIMIM की कोई बातचीत नहीं हुई।
- जनता का समर्थन सीधे महागठबंधन को मिलेगा।
- उन्हें भरोसा है कि AIMIM कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी।
सीटों का अनुमान और सीएम चेहरा
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि –
- राजद अकेले 100 से ज्यादा सीटें जीतेगी।
- सीएम पद पर गठबंधन में कोई विवाद नहीं होगा।
- समय आने पर उनका नाम ही घोषित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर त्रिशंकु स्थिति बनी तो नीतीश कुमार से किसी तरह का समझौता नहीं होगा।

नीतीश कुमार और बीजेपी पर तीखा हमला
तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार और बीजेपी पर लगातार निशाना साधा –
- नीतीश को “थका हुआ मुख्यमंत्री” बताया।
- कहा कि 20 साल में एक भी बड़ा उद्योग या शुगर मिल नहीं खुली।
- बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
- “डबल इंजन सरकार” को “डबल इंजन अपराध और भ्रष्टाचार” कहा।

लालू प्रसाद यादव का मार्गदर्शन
तेजस्वी यादव ने यह भी माना कि वे अब भी अपने पिता लालू यादव से मार्गदर्शन लेते हैं।
- चुनावी रणनीति, रैलियों और कार्यक्रमों पर लालू यादव की राय ली जाती है।
- राजद की विचारधारा आज भी सामाजिक न्याय और समावेशिता पर टिकी है।

निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राज्य की दिशा और दशा बदलने का चुनाव माना जा रहा है।
- एक तरफ नीतीश कुमार और एनडीए गठबंधन है, जिन पर थकावट, भ्रष्टाचार और विकास की कमी के आरोप हैं।
- दूसरी तरफ तेजस्वी यादव हैं, जो खुद को युवा, विज़न वाले और रोजगार देने वाले नेता के रूप में पेश कर रहे हैं।
तेजस्वी का नारा है –
👉 “पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई और सुनवाई वाली सरकार”
अब देखना यह है कि बिहार की जनता किस पर भरोसा जताती है –
20 साल पुरानी सरकार पर या बदलाव का दावा करने वाले युवा नेता पर।

