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‘द बंगाल फाइल्स’ रिलीज से पहले विवादों में फंसी

डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री की आगामी हिंदी फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। यह फिल्म उनकी चर्चित “फाइल्स ट्राइलॉजी” की तीसरी कड़ी है, जिसमें पहले ‘द ताशकंद फाइल्स’ (2019) और ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022) शामिल हैं। फिल्म 5 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है, जो भारत में शिक्षक दिवस के दिन पड़ रही है।

फिल्म का विषय 1946 के ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ पर आधारित है। यह वह ऐतिहासिक घटना है जिसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन से पहले बंगाल प्रेसीडेंसी के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा फैली थी। इसमें मुख्य रूप से 16 अगस्त 1946 को हुए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ और नोआखाली दंगे जैसी घटनाओं को फिल्म में दिखाया गया है।


ट्रेलर लॉन्च पर विवाद

16 अगस्त को कोलकाता में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान बवाल हो गया। इवेंट बीच में ही रोक दिया गया और होटल में तार काटने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। फिल्म मेकर्स के खिलाफ एक FIR भी दर्ज हुई।

डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाया गया, जबकि पुलिस ने कहा कि आयोजकों ने आवश्यक लाइसेंस नहीं लिया था। इसके चलते इवेंट रोक दिया गया।


मिथुन चक्रवर्ती का रिएक्शन

दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित 75 वर्षीय अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि फिल्म सच्चाई को दिखाती है, और कई लोग सच का सामना नहीं करना चाहते।


फिल्म के खिलाफ FIR

फिल्म से जुड़े विवादों में नया मोड़ तब आया जब 1946 के दंगों में अहम भूमिका निभाने वाले बंगाली योद्धा गोपाल मुखर्जी के पोते शांतनु मुखर्जी ने विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उनका आरोप है कि फिल्म उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है।


अभिनेता सास्वत चटर्जी का बयान

फिल्म में भूमिका निभाने वाले अभिनेता सास्वत चटर्जी ने हाल ही में इंटरव्यू में कहा कि फिल्म का नाम पहले ‘द दिल्ली फाइल्स’ था, लेकिन बाद में इसे बदलकर ‘द बंगाल फाइल्स’ कर दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें फिल्म की पूरी कहानी और नाम बदलने की प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

सास्वत चटर्जी ने स्पष्ट किया कि वह इतिहासकार नहीं हैं और फिल्म के पूरे विवाद से खुद को अलग रखना चाहते हैं।


फिल्म की कहानी और ऐतिहासिक संदर्भ

‘द बंगाल फाइल्स’ 1940 के दशक में अविभाजित बंगाल में फैले सांप्रदायिक हिंसा पर आधारित है। इसमें हिंदू नरसंहार और उस समय की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाया गया है।

फिल्म में टिप्पेरा (अब कोमिल्ला, बांग्लादेश) और बंगाल प्रेसीडेंसी के अन्य हिस्सों में फैली हिंसा को भी सिनेमाई रूप में पेश किया गया है। यह फिल्म उन वास्तविक घटनाओं पर आधारित है जिन्होंने भारत की आज़ादी और विभाजन की दिशा को प्रभावित किया।

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म का नाम बदलकर ‘द बंगाल फाइल्स’ रखा, ताकि यह दर्शाया जा सके कि “भारत का भाग्य दिल्ली में नहीं, बल्कि बंगाल में लिखा गया था।”


सामाजिक और राजनीतिक विवाद

फिल्म की रिलीज से पहले ही विवाद और FIR ने इसे मीडिया में चर्चा का विषय बना दिया। फिल्म को लेकर लोग दो हिस्सों में बंट गए हैं। एक तरफ इसे सच्चाई दिखाने वाली फिल्म माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई इतिहासकार और राजनीतिक समूह इसे दक्षिणपंथी एजेंडा वाली फिल्म कह रहे हैं।

फिल्म से जुड़े विवाद ने कोलकाता में ट्रेलर लॉन्च को रोक दिया और आयोजकों, पुलिस और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया।


फिल्म के प्रभाव और उम्मीदें

‘द बंगाल फाइल्स’ न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाने वाली फिल्म है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक विमर्श को भी जन्म देने की उम्मीद है। फिल्म से यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे 1946 के दंगे बंगाल और भारत की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर गए।

फिल्म का उद्देश्य सिर्फ ऐतिहासिक घटनाओं को दिखाना नहीं है, बल्कि यह दर्शकों को सोचने और सवाल उठाने के लिए भी प्रेरित करती है।


निष्कर्ष

‘द बंगाल फाइल्स’ रिलीज से पहले विवादों में फंसी है, लेकिन इसके पीछे फिल्म का ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व भी है। फिल्म में दर्शाई गई घटनाएं, उसके ट्रेलर लॉन्च विवाद, FIR और आलोचनाओं ने इसे चर्चा का केंद्र बना दिया है।

फिल्म के रिलीज के बाद यह देखने वाली बात होगी कि दर्शक इसे सामाजिक चेतावनी, ऐतिहासिक दस्तावेज या राजनीतिक विमर्श के रूप में स्वीकार करते हैं।

विवादों के बावजूद फिल्म का मकसद 1946 के भयानक दंगों की सच्चाई सामने लाना और इतिहास को याद रखना है।

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